Monday, May 18, 2026
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हरियाणा मंत्रिमंडल ने 10 बड़ी औद्योगिक नीतियों को मंजूरी देकर बजट घोषणा और संकल्प पत्र के वायदों को किया पूरा

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Chandigarh News : मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में 10 प्रमुख औद्योगिक नीतियों को मंजूरी दी गई। इन नीतियों का उद्देश्य संकल्प पत्र तथा बजट घोषणाओं को प्रभावी रूप से लागू करते हुए विनिर्माण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरती प्रौद्योगिकियों, हरित उद्योगों तथा कृषि आधारित आर्थिक विकास को व्यापक बढ़ावा देना है।  उल्लेखनीय है कि इन नीतियों को अंतिम रूप देने से पहले मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने स्वयं दो दिनों तक उद्योगपतियों एवं विभिन्न औद्योगिक संगठनों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। इसके अलावा, उक्त नीतियां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ तथा ‘मेक इन इंडिया’ के विजन के अनुरूप तैयार की गई हैं।

 

1. मेक इन हरियाणा औ‌द्योगिक नीति 2026

 

मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट मेक इन हरियाणा औ‌द्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दी। यह नीति एचईईपी 2020 का स्थान लेगी और यह प्रदेश की मुख्य औ‌द्योगिक नीति होगी। इसके तहत अगले पांच वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश, 10 लाख नए रोजगार और प्रदेश के निर्यात को बढ़ाने के लक्ष्य पर फोकस किया गया है।

 

नई नीति में पुरानी ए, बी, सी और डी ब्लॉक आधारित क्षेत्रीय व्यवस्था को समाप्त कर कोर, इंटरमीडिएट, सब-प्राइम और प्राइम/फोकस क्षेत्र आधारित नई व्यवस्था लागू की गई है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सभी ब्लॉकों में औ‌द्योगिक निवेश के लिए वित्तीय प्रोत्साहन उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से अब औ‌द्योगिक प्रोत्साहन प्रदेश के हर ब्लॉक तक पहुंचेंगे और जिन क्षेत्रों में उ‌द्योगों की अधिक आवश्यकता है, उन्हें अधिक लाभ मिलेगा।

 

नीति में नए औ‌द्योगिक निवेश के लिए पूंजीगत सब्सिडी, हरियाणा कौशल रोजगार निगम पर पंजीकृत युवाओं में से औ‌द्योगिक इकाइयों द्वारा भर्ती और अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन देने के प्रावधान किए गए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के अपने बजट अभिभाषण में मुख्यमंत्री ने नए निवेश, स्थानीय युवाओं की भर्ती और अनुसंधान एवं विकास को नीति के माध्यम से प्रोत्साहित करने की बात कही थी, जिसे इस नीति में शामिल किया गया है।

 

इस नीति में 30 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक शुद्ध एसजीएसटी प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। बड़ी इकाइयों को यह लाभ7 वर्ष, मेगा इकाइयों को 10 वर्ष और अल्ट्रा मेगा परियोजनाओं को विशेष पैकेज के तहत 12 वर्ष तक लाभ मिलेगा। बड़ी इकाइयों के लिए 5 से 20 प्रतिशत और प्राइम/फोकस क्षेत्रों में मेगा तथा अल्ट्रा मेगा इकाइयों के लिए पात्र पूंजीगत व्यय पर 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सब्सिडी दी जाएगी। स्टाम्प ड्यूटी में भी 30 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है।

 

स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा के स्थानीय कर्मचारियों हेतु रोजगार सृजन सब्सिडी को 48,000 रुपये से बढ़ाकर 10 वर्षों तक प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक कर दिया गया है। महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजन, अग्निवीर और पूर्व सैनिकों के लिए यह सहायता 1.20 लाख रुपये तक होगी। वित्त वर्ष 2026- 27 के बजट में स्थानीय युवाओं को उ‌द्योगों में रोजगार दिलाने के लिए रोजगार सब्सिडी बढ़ाने की बात कही गई थी। संकल्प पत्र की प्रतिबद्धता के अनुरूप, हरियाणा कौशल रोजगार निगम पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति करने वाली इकाइयों को नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के ईपीएफ अंशदान की प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा।

 

निवेशकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 1 अप्रैल 2026 से देरी होने पर 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का प्रावधान किया गया है। बजट और संकल्प पत्र में सरकारी संस्थाओं द्वारा समय पर भुगतान न करने पर ब्याज देने की बात कही गई थी। इसी तरह प्रोत्साहन राशि के भुगतान में पारदर्शिता लाने के लिए पात्र प्रोत्साहन की 50 प्रतिशत राशि 7 कार्य दिवसों में और शेष राशि 45 दिनों में जारी की जाएगी।

 

भूमि व्यवहार्यता प्रमाण पत्र के माध्यम से 45 कार्य दिवसों में भूमि स्वामित्व, भू-उपयोग, भार और संबंधित अनुमतियों की स्थिति पर स्पष्टता दी जाएगी। यह निवेशकों को जमीन से जुड़ी प्रारंभिक अनिश्चितताओं से राहत देने वाला एक बड़ा सुधार है। निर्यातकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार रखने हेतु निर्यात प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। नीति में कार्बन क्रेडिट, नवीकरणीय ऊर्जा, हरित भवन और शून्य द्रव अपशिष्ट प्रणाली जैसे हरित उ‌द्योग प्रावधान भी किए गए हैं।

 

2. हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026

 

मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एवं विनिर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों की नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा निर्माण और सेमीकंडक्टर से जुड़े निवेश को आकर्षित करेगी।

 

इसका उ‌द्देश्य हरियाणा को इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाना है। यह नीति भारत सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना, इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जा विनिर्माण योजना और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के अनुरूप है।

 

आईएमटी सोहना में 500 एकड़ क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। नीति के तहत 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति इकाई 200 करोड़ रुपये होगी। 50 से 80 प्रतिशत तक परिचालन सहायता भी दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति वर्ष 20 करोड़ रुपये होगी। हरियाणा में बने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी। सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए अलग से नीति तैयार की जा रही है।

 

3. हरियाणा फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज विनिर्माण नीति 2026

मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज विनिर्माण नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में फार्मास्यूटिकल और मेडिकल डिवाइसेज क्षेत्र के लिए नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार फार्मा, चिकित्सा उपकरणों, क्लीनिकल ट्रायल, जैव-समतुल्यता अध्ययन और स्वास्थ्य विनिर्माण से जुड़े निवेश को बढ़ावा देगी।

 

कोविड महामारी के बाद दवाओं और चिकित्सा उपकरणों में आत्मनिर्भरता की आवश्यकता और अधिक स्पष्ट हुई है। यह नीति आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य और आयात निर्भरता कम करने की राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुरूप स्वास्थ्य क्षेत्र में हरियाणा का महत्वपूर्ण योगदान है।

 

नीति में महिलाओं को रात्रि पाली में कार्य करने की अनुमति, पात्र इकाइयों को आवश्यक सेवा का दर्जा और पहले से स्वीकृत दवा फॉर्मूलेशन के लिए त्वरित मंजूरी जैसे प्रावधान भी किए गए हैं।

 

4. हरियाणा टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट विनिर्माण नीति 2026

 

मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट विनिर्माण नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में टॉयज एवं स्पोर्ट्स इक्विपमेंट विनिर्माण नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार खिलौना और खेल उपकरण क्षेत्र में विनिर्माण, निर्यात, डिजाइन, नवाचार और एमएसएमई भागीदारी को बढ़ावा देगी।

 

भारत ने खिलौना क्षेत्र में आयात निर्भरता घटाकर निर्यात बढ़ाया है। इसी अवसर को ध्यान में रखते हुए हरियाणा में विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित आधारित खिलौनों, स्मार्ट खिलौनों, पर्यावरण अनुकूल खिलौनों और उच्च मूल्य वाले खेल उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।

 

नीति के तहत 30 प्रतिशत पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति इकाई 50 करोड़ रुपये होगी। पांच वर्षों तक 70 प्रतिशत परिचालन सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति वर्ष 3 करोड़ रुपये होगी। इस नीति का लक्ष्य 5,000 करोड़ रुपये का निवेश और 25,000 रोजगार सृजित करना है।

 

5. हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट रीसाइक्लिंग नीति 2026

 

मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक्स वेस्ट रीसाइक्लिंग नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में रीसाइक्लिंग सुविधा प्रोत्साहन नीति तैयार करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार ई-वेस्ट संग्रहण, अलगाव, पुनर्चक्रण, प्रमाणन और औपचारिक रीसाइक्लिंग व्यवस्था को प्रोत्साहित करेगी, ताकि इलेक्ट्रॉनिक कचरे को सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से संसाधित किया जा सके।

 

यह नीति भारत सरकार के चक्रीय अर्थव्यवस्था लक्ष्यों, ई-वेस्ट प्रबंधन नियम 2022 और सतत औ‌द्योगिक विकास की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ई-वेस्ट भी तेजी से बढ़ रहा है। भारत में हर वर्ष लगभग 17.5 लाख मीट्रिक टन ई-वेस्ट उत्पन्न होता है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में चला जाता है। इस नीति के माध्यम से हरियाणा इस चुनौती को अवसर में बदलना चाहता है।

 

नीति का उ‌द्देश्य ई-वेस्ट क्षेत्र को संगठित करना, हरित रोजगार सृजित करना और पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नवीनतम उपकरणों के लिए कच्चे माल में बदलना है। नीति के तहत 30 प्रतिशत पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति इकाई 25 करोड़ रुपये होगी। पांच वर्षों तक 70 प्रतिशत परिचालन सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा 2 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगी। हरियाणा में पंजीकृत रीसाइक्लर इकाइयों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाएगी।

 

6. हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स नीति 2026

 

मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स नीति 2026 को मंजूरी दी। यह नीति सितंबर 2025 में स्टार्टअप्स और उ‌द्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ‌द्वारा की गई उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें गुरुग्राम और हरियाणा को विश्व की वैश्विक क्षमता केंद्र राजधानी बनाने के लिए समर्पित नीति तैयार करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई थी।

 

भारत में लगभग 1,700 वैश्विक क्षमता केंद्र हैं, जिनमें करीब 19 लाख पेशेवर कार्यरत हैं। हरियाणा में पहले से 270 से अधिक ऐसे केंद्र मौजूद हैं। नई नीति के माध्यम से अगले 100 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्रों को हरियाणा में आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

 

इसके लिए समर्पित वैश्विक क्षमता केंद्र मिशन, गुरुग्राम में एकल खिड़की डेस्क, निवेशक मिलान मंच और सलाहकार परिषद बनाई जाएगी। नीति के तहत गुरुग्राम और अन्य जिलों के लिए अलग-अलग सहायता प्रावधान किए गए हैं। परिचालन सहायता 5 से 9 वर्षों तक दी जाएगी, जिसकी सीमा 15 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगी। डीएसआईआर/सीएसआईआर से मान्यता प्राप्त अनुसंधान एवं विकास केंद्रों को भी पूंजीगत और परिचालन सहायता दी जाएगी।

 

7. हरियाणा आईटी/आईटीईएस, एआई एवं उभरती प्रौ‌द्योगिकी नीति 2026

 

मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा आईटी/आईटीईएस, एआई एवं उभरती प्रौ‌द्योगिकी नीति 2026 को मंजूरी दी। यह नीति डिजिटल इंडिया, राष्ट्रीय एआई मिशन और राज्य में उभरती प्रौ‌द्योगिकियों को बढ़ावा देने की सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप है। इसके माध्यम से सूचना प्रौ‌द्योगिकी, आईटी सक्षम सेवाओं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड और बैंडविड्थ आधारित सेवाओं में निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

हरियाणा में पहले से 1.55 लाख करोड़ रुपये से अधिक आकार का सूचना प्रौ‌द्योगिकी और आईटी सक्षम सेवा क्षेत्र है। नई नीति का उद्देश्य हरियाणा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों का प्रमुख केंद्र बनाना है। गुरुग्राम में वैश्विक कृत्रिम बु‌द्धिमत्ता केंद्र और पंचकूला में हरियाणा उन्नत कंप्यूटिंग सुविधा स्थापित की जाएगी। 50,000 से अधिक पेशेवरों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

कृत्रिम बु‌द्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे क्षेत्रों में तीन उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र को 10 करोड़ रुपये तक पूंजीगत सहायता और 2 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तक परिचालन सहायता दी जाएगी। नीति के तहत 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता और पांच वर्षों तक 50 से 70 प्रतिशत तक परिचालन सहायता दी जाएगी।

 

8. हरियाणा एवीजीसी-एक्सआर नीति 2026

 

मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट हरियाणा एवीजीसी-एक्सआर नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में एवीजीसी-एक्सआर नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों में स्टूडियो, सामग्री निर्माण, बौ‌द्धिक संपदा और कौशल विकास को बढ़ावा देगी।

 

केंद्रीय बजट में रचनात्मक अर्थव्यवस्था को अंरिंज इकॉनमी के रूप में महत्व दिया गया है। हरियाणा इस क्षेत्र में शुरुआती बढ़त लेना चाहता है। भारत के एवीजीसी-एक्सआर क्षेत्र में 2030 तक 20 लाख रोजगार सृजित करने की क्षमता है।

 

नीति के तहत 20 से 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता दी जाएगी, जिसकी सीमा प्रति इकाई 50 करोड़ रुपये होगी। राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के सहयोग से तीन उत्कृष्टता केंद्र बनाए जाएंगे। इनमें एक गेमिंग और इंटरएक्टिव मीडिया के लिए तथा दो एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, कॉमिक्स और एक्सआर के लिए होंगे।

 

9. न्यू हरियाणा डेटा सेंटर नीति 2026

 

मंत्रिमंडल ने ड्राफ्ट न्यू हरियाणा डेटा सेंटर नीति 2026 को मंजूरी दी। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में डेटा सेंटर नीति तैयार कर चालू वर्ष में लागू करने की बात कही गई थी। इस नीति के माध्यम से राज्य सरकार कृत्रिम बु‌द्धिमत्ता, क्लाउड कंप्यूटिंग, 5जी सेवाओं और डिजिटल शासन के लिए जरूरी डेटा अवसंरचना को मजबूत करेगी।

 

आज हर डिजिटल भुगतान, कृत्रिम बु‌द्धिमता मॉडल और सरकारी डिजिटल सेवा डेटा अवसंरचना पर निर्भर है। हरियाणा राष्ट्रीय राजधानी से निकटता, भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, 500 प्रतिशत तक फ्लोर एरिया रेश्यो में छूट, दोहरी ग्रिड आपूर्ति और आवश्यक सेवा का दर्जा देकर डेटा सेंटर निवेशकों को आकर्षित करेगा।

 

10 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले हाइपर डेटा सेंटर को 20 प्रतिशत पूंजीगत सहायता, जिसकी सीमा 25 करोड़ रुपये होगी, और 50 प्रतिशत परिचालन सहायता, जिसकी सीमा 8 करोड़ रुपये प्रति वर्ष होगी, दी जाएगी। 1 से 10 मेगावाट क्षमता वाले कौर डेटा सेंटर को भी पूंजीगत और परिचालन सहायता मिलेगी। 20 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले डेटा सेंटर पार्कों को अतिरिक्त सहायता और ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज सहायता दी जाएगी।

 

10. हरियाणा एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति 2026

 

मंत्रिमंडल ने हरियाणा एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति 2026 को भी मंजूरी दी। यह नीति किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की सरकार की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाती है। हरियाणा के किसानों ने देश की खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अब सरकार का उ‌द्देश्य है कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिले और कृषि उत्पादों में मूल्य संवर्धन बढ़े।

 

नीति के तहत राज्य में फूड प्रोसेसिंग इकाइयों, कोल्ड चेन अवसंरचना, फूड पार्क, पैकेजिंग इकाइयों, फूड टेस्टिंग लैब और इन्क्यूबेशन सेंटरों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे किसानों, एफपीओ, प्रोसेसिंग इकाइयों और बाजारों के बीच मजबूत संपर्क बनेगा। फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

 

इस नीति के माध्यम से 5,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने और लगभग 30,000 रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति वर्ग, दिव्यांगजन, पूर्व सैनिकों, निर्यात उन्मुख इकाइयों और विदेशी निवेशकों के साथ संयुक्त उपक्रमों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। फूड प्रोसेसिंग और पैकेजिंग क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक तकनीक और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा।

 

11. पहली 9 नीतियों में साझा प्रोत्साहन व्यवस्था

 

एग्री बिजनेस एवं एग्रो प्रोसेसिंग नीति को छोड़कर अन्य 9 नीतियों में साझा प्रोत्साहन व्यवस्था अपनाई गई है। इसके तहत स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा के स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाली इकाइयों को 10 वर्षों तक प्रति कर्मचारी प्रति वर्ष 1 लाख रुपये तक रोजगार सृजन सब्सिडी मिलेगी। महिलाओं, अनुसूचित जाति, दिव्यांगजन, अग्निवीर और पूर्व सैनिकों के लिए यह सहायता 1.20 लाख रुपये तक होगी।

 

हरियाणा कौशल रोजगार निगम पोर्टल के माध्यम से नियुक्ति करने वाली इकाइयों को पांच वर्षों तक नियोक्ता और कर्मचारी, दोनों के ईपीएफ अंशदान की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति दी जाएगी। घरेलू इकाइयों के स्थानांतरण के लिए 5 करोड़ रुपये और अंतरराष्ट्रीय इकाइयों के स्थानांतरण के लिए 10 करोड़ रुपये तक सहायता का प्रावधान किया गया है।

 

निर्यात, हरित ऊर्जा, शून्य द्रव अपशिष्ट प्रणाली और पेटेंट व्यावसायीकरण को भी बढ़ावा दिया जाएगा। घरेलू पेटेंट के व्यावसायीकरण पर 50 लाख रुपये और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट पर 1 करोड़ रुपये तक सहायता मिलेगी। भारत सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना या अन्य प्रमुख योजनाओं का लाभ लेने वाली इकाइयां राज्य के सामान्य प्रोत्साहन पैकेज के बजाय भारत सरकार से प्राप्त राशि पर 50 प्रतिशत राज्य टॉप-अप का विकल्प चुन सकेंगी।

 

निजी औ‌द्योगिक पार्क विकसित करने वाले डेवेलपर्स को पूंजीगत सब्सिडी या शुद्ध एसजीएसटी प्रतिपूर्ति में से विकल्प चुनने की सुविधा दी जाएगी। ऐसे पार्कों को 100 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी प्रतिपूर्ति भी मिलेगी, जिसकी सीमा प्रति पार्क 45 करोड़ रुपये होगी। विस्तार परियोजनाओं के लिए पात्रता सीमा को सरल कर मौजूदा अचल पूंजी निवेश के 25 प्रतिशत तक कर दिया गया है और रोजगार तैयारी कार्यक्रम को छह माह तक बढ़ाया गया है।

 

इन नीतियों की विशेषता केवल प्रोत्साहनों में नहीं, बल्कि इनके पीछे की समग्र सोच में है। सेमीकंडक्टर से लेकर रचनात्मक उ‌द्योगों तक, जीवनरक्षक दवाओं से लेकर हरित रीसाइक्लिंग तक, डिजिटल अवसंरचना से लेकर कृषि आधारित उ‌द्योगों तक, ये नीतियां आधुनिक हरियाणा की नई औ‌द्योगिक दिशा तय करेंगी। सरकार का लक्ष्य है कि हरियाणा निवेश, रोजगार, निर्यात, नवाचार और ग्रामीण समृ‌द्धि के अगले चरण में देश का अग्रणी राज्य बने और प्रधानमंत्री के विकसित भारत- 2047 का सिरमौर बने।

 

कैबिनेट ने पिछली अधिसूचना के तहत 2024-25 में जारी BC-A/BC-B नॉन क्रीमी लेयर प्रमाणपत्रों की वैधता को मंज़ूरी दी, एचपीएससी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को होगा लाभ

 

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में गत 17 नवंबर, 2021 की अधिसूचना के तहत वर्ष 2024-25 के दौरान जारी BC-A और BC-B नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्रों की वैधता देने के संबंध में एक प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई।

 

कैबिनेट द्वारा लिया गया यह निर्णय हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2024 में विभिन्न विषयों में पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT) के 3069 पदों के लिए जारी भर्ती विज्ञापनों के मद्देनज़र लिया गया है। गत 23 जुलाई, 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन के अनुसार, BC-A और BC-B श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों को नवीनतम सरकारी निर्देशों और 16 जुलाई, 2024 की अधिसूचना के अनुरूप नए प्रमाणपत्र जमा करने की आवश्यकता थी।

 

16 जुलाई, 2024 की नई अधिसूचना जारी होने के बाद, 17 नवंबर, 2021 की अधिसूचना के तहत पहले जारी किए गए प्रमाणपत्रों को एचपीएससी द्वारा वैध नहीं माना जा रहा था, जिसके परिणामस्वरूप कई आवेदकों की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई थी। इसके बाद, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के समक्ष कई रिट याचिकाएँ दायर की गईं।

 

कैबिनेट को सूचित किया गया कि 16 जुलाई, 2024 की अधिसूचना में किया गया मुख्य बदलाव केवल क्रीमी लेयर की स्थिति निर्धारित करने के लिए वार्षिक आय सीमा को 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये करने से संबंधित है। इसलिए, जो उम्मीदवार 2021 की अधिसूचना के अनुसार नॉन-क्रीमी लेयर के अंतर्गत वर्गीकृत थे, वे संशोधित मानदंडों के तहत भी नॉन-क्रीमी लेयर श्रेणी में ही बने रहेंगे।

 

इसे ध्यान में रखते हुए, कैबिनेट ने मंज़ूरी दी कि 17 नवंबर, 2021 की अधिसूचना के तहत वर्ष 2024-25 के दौरान, 23 जुलाई, 2024 से पहले जारी किए गए BC-A/BC-B (नॉन-क्रीमी लेयर) प्रमाणपत्रों को सभी प्रयोजनों के लिए वैध माना जाएगा। इस निर्णय से प्रभावित उम्मीदवारों को काफी राहत मिलने और भर्ती प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।

 

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हरियाणा कैबिनेट ने एनसीआर में बेहतर परिवहन को बढ़ावा देने के लिए एग्रीगेटर और/ या डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए नए नियमों को मंज़ूरी दी, 1 जनवरी, 2026 से एनसीआर बेड़े में सिर्फ़ सीएनजी, ईवी और स्वछ्तम ईंधन वाली गाड़ियां ही शामिल होंगी

चंडीगढ़, 18 मई – हरियाणा मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की मीटिंग में हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 के तहत मिनिस्ट्री ऑफ़ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाईवेज़ द्वारा जारी दिशानिर्देश और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट के निर्देशों के अनुसार एग्रीगेटर लाइसेंस देने के लिए नियमों को मंज़ूरी दी गई। यह फैसला राज्य के एनसीआर जिलों में बेहतर परिवहन को बढ़ावा देने, वाहनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने और वायु गुणवता को बेहतर बनाने के लिए लिया गया है।

संशोधित नियमों के तहत 1 जनवरी, 2026 से राष्ट्रीय राजधानी इलाकों में एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों के बेड़े में शामिल सभी गाड़ियां आवश्यक तौर पर सीएनजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, बैटरी से चलने वाली गाड़ियां या किसी दूसरे स्वछ्तम ईंधन पर आधारित होंगी। इसके अलावा, एनसीआर इलाकों में मौजूदा बेड़े में सिर्फ़ सीएनजी या इलेक्ट्रिक 3-व्हीलर, ऑटो-रिक्शा को ही शामिल करने की अनुमति होगी।

कैबिनेट ने राज्य में चल रहे ऐप-बेस्ड पैसेंजर एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए एक बड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क बनाने के लिए हरियाणा मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1993 के रूल 86 ए में बदलाव की भी मंज़ूरी दी।

नए नियमों में एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए आवश्यक लाइसेंसिंग, ड्राइवरों और गाड़ियों के लिए ऑनबोर्डिंग नियम, पैसेंजर सुरक्षा के उपाय, शिकायत सुलझाने के तरीके, प्रेरणा और पुनरावलोकन प्रशिक्षण कार्यक्रम, ड्राइवरों और पैसेंजर के लिए इंश्योरेंस कवरेज, ऐप्स के लिए साइबर सिक्योरिटी का पालन और किराए का रेगुलेशन शामिल हैं।

नियमों अनुसार एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को यात्रियों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का बीमा कवरेज, ड्राइवरों के लिए कम से कम 5 लाख रुपये का स्वास्थय बीमा और ऑनबोर्डेड ड्राइवरों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस करवाना अनिवार्य होगा।

इन नियमों के तहत गाड़ियों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, पैनिक बटन, फर्स्ट-एड किट और फायर एक्सटिंग्विशर लगाना भी ज़रूरी है। एग्रीगेटर्स को पैसेंजर की मदद और शिकायत दूर करने के लिए 24×7 घण्टे कंट्रोल रूम और कॉल सेंटर भी बनाने होंगे।

पारदर्षी और जिम्मेवारी को मज़बूत करने के लिए नियमों में वाहन और सारथी पोर्टल के ज़रिए गाड़ी और ड्राइवर की डिटेल्स के वाहन का डिजिटल प्रमाणीकरण का प्रबंध करना है। एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स को ऑनबोर्डेड ड्राइवरों और गाड़ियों का डिटेल्ड डिजिटल रिकॉर्ड भी रखना होगा।

बैठक में मंत्रिपरषद को अवगत करवाया गया कि एग्रीगेटर्स, डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स और ई-कॉमर्स संस्थाओं के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंसिंग प्रोसेस निर्धारित पोर्टल cleanmobility.haryanatransport.gov.in. के ज़रिए संचालन किया जाएगा। नए फ्रेमवर्क में ड्राइवर वेलफेयर, किराया शेयरिंग, सेफ्टी स्टैंडर्ड, दिव्यांगजन-फ्रेंडली गाड़ियों को शामिल करने और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बढ़ने से जुड़े नियम भी शामिल किए हैं।

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हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग के नए सेवा नियमों 2026 को दी मंत्रिमंडल ने मंजूरी

 

चंडीगढ़, 18 मई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में अधीक्षक (फील्ड कैडर) के पद के लिए नए सेवा नियमों, यानी ‘हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग, उप-कार्यालय कॉलेज कैडर (ग्रुप-बी) सेवा नियम, 2026’ को मंजूरी दी गई। ये नियम आधिकारिक राजपत्र (ऑफिशियल गजट) में उनके प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।

नए नियमों के अनुसार नियुक्ति के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता और अनुभव (यदि कोई हो), पदोन्नति (प्रमोशन) और स्थानांतरण (ट्रांसफर) या प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के माध्यम से तय किया जाएगा।

उप-अधीक्षक (डिप्टी सुपरिटेंडेंट) के रूप में एक वर्ष का अनुभव या सहायक (असिस्टेंट) के रूप में 10 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य है।

अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) के रूप में एक वर्ष का अनुभव, मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएशन) की डिग्री, और मैट्रिक (दसवीं) में एक विषय के रूप में हिंदी या संस्कृत, या उच्च शिक्षा में एक विषय के रूप में हिंदी विषय होना अनिवार्य है।

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हरियाणा मंत्रिमंडल ने राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम के तहत वन-टाइम, वन-वे स्विच सुविधा को मंजूरी दी

चंडीगढ़, 18 मई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार के कर्मचारियों के संबंध में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत वन-टाइम, वन-वे स्विच सुविधा (One-time, One-way Switch Facility) को मंजूरी प्रदान की गई।

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने 24 जनवरी, 2025 की अधिसूचना के माध्यम से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत एक विकल्प के रूप में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की थी, जो 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी हुई। इसी प्रकार, भारत सरकार के अनुरूप हरियाणा सरकार ने भी 2 जुलाई, 2025 की अधिसूचना के माध्यम से राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लागू की थी, जो 1 अगस्त, 2025 से प्रभावी हुई।

इसके उपरांत, भारत सरकार ने 25 अगस्त, 2025 के कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) से राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) में वन-टाइम, वन-वे स्विच सुविधा प्रदान की।

इसके मद्देनजर उक्त निर्णय को राज्य सरकार द्वारा अपने कर्मचारियों के संबंध में 2 जुलाई, 2025 को अधिसूचित सूचना का भी संदर्भ लिया जाएगा कि एक साथ एक ही प्रकार से यूनिफाइड पेंशन स्कीम को हरियाणा नई पेंशन स्कीम की उपलब्धता सभी राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए होगी जिन्होंने यूनिफाइड पेंशन स्कीम का विकल्प चुना है।

यह स्विच सुविधा यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) का विकल्प चुनने वाले कर्मचारी किसी भी समय प्रयोग कर सकेंगे, किन्तु अधिवार्षिकी (सेवानिवृत्ति) की तिथि से एक वर्ष पूर्व तक ही इसका लाभ लिया जा सकेगा। यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर स्विच सुविधा का उपयोग नहीं किया जाता है, तो संबंधित कर्मचारी डिफॉल्ट रूप से यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के अंतर्गत ही बना रहेगा।

इसके अतिरिक्त, जिन मामलों में कर्मचारी को दंडस्वरूप सेवा से हटाया गया हो, बर्खास्त किया गया हो या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई हो अथवा जिन मामलों में भारी जुर्माना हो, विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित या प्रस्तावित हो, उनमें यह स्विच सुविधा अनुमन्य नहीं होगी।

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हरियाणा कैबिनेट ने अनधिकृत औद्योगिक इकाइयों के नियमितीकरण हेतु नीति संशोधनों को दी मंजूरी

 

चंडीगढ़, 18 मई – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा प्रबंधन नागरिक सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना की कमी वाले क्षेत्र (विशेष प्रावधान) संशोधन अधिनियम, 2025 के प्रावधानों को लागू करने हेतु संशोधनों को मंजूरी दी गई। इस निर्णय का उद्देश्य राज्यभर में अनधिकृत औद्योगिक प्रतिष्ठानों के नियमितीकरण को सुगम बनाना तथा ऐसे क्षेत्रों में बुनियादी नागरिक सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना उपलब्ध कराना है।

 

कैबिनेट को अवगत कराया गया कि राज्य सरकार ने नगरपालिकाओं की सीमा से बाहर स्थित आधारभूत संरचना एवं नागरिक सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा वहां रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के उद्देश्य से वर्ष 2021 में हरियाणा प्रबंधन नागरिक सुविधाएं एवं आधारभूत संरचना अभावग्रस्त क्षेत्र (विशेष प्रावधान) अधिनियम लागू किया था। इसके बाद 19 जुलाई 2022 को नीति अधिसूचित की गई तथा 6 अप्रैल 2023 को राहत संबंधी निर्देश जारी किए गए। हालांकि, वर्तमान व्यवस्था औद्योगिक कॉलोनियों पर लागू नहीं होती थी।

 

मुख्यमंत्री द्वारा राज्य बजट 2025 के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप सरकार ने यह निर्णय लिया कि अनधिकृत औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी इसी प्रकार का लाभ दिया जाए ताकि ऐसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा एवं नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसी उद्देश्य से अधिनियम में संशोधन किए गए, जिन्हें 3 अक्टूबर 2025 को हरियाणा अधिनियम संख्या 22, 2025 के माध्यम से अधिसूचित किया गया।

 

स्वीकृत संशोधनों के तहत, कम से कम 10 एकड़ के निरंतर क्षेत्र में फैली, न्यूनतम 50 औद्योगिक इकाइयों वाली तथा 3 अक्टूबर 2025 से पूर्व निर्मित औद्योगिक कॉलोनियां इस नीति के अंतर्गत पात्र होंगी।

 

कैबिनेट ने एक ऑनलाइन पोर्टल के निर्माण को भी मंजूरी दी है, जिसके माध्यम से उद्यमी या उनके अधिकृत प्रतिनिधि आधारभूत संरचना से वंचित औद्योगिक क्षेत्रों की घोषणा तथा औद्योगिक प्रतिष्ठानों के नियमितीकरण हेतु आवेदन कर सकेंगे।

 

संशोधित नीति में “अधिकृत व्यक्ति” की अवधारणा भी जोड़ी गई है, जो औद्योगिक कॉलोनी में स्थित उद्यमियों एवं औद्योगिक प्रतिष्ठानों की ओर से आवेदन कर सकेगा। कैबिनेट को बताया गया कि आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने के लिए विस्तृत दस्तावेजी आवश्यकताएं, जांच प्रणाली तथा जिला स्तरीय स्वीकृति प्रक्रियाएं भी शामिल की गई हैं।

 

इस निर्णय से राज्य में अनधिकृत औद्योगिक क्लस्टरों में संचालित हजारों औद्योगिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही इससे योजनाबद्ध आधारभूत संरचना विकास, पर्यावरणीय अनुपालन तथा हरियाणा में औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

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कैबिनेट ने डेयरी फार्मिंग के लिए स्वयं सहायता समूहों को ‘शामलात देह’ भूमि पट्टे पर देने को मंजूरी दी

 

चंडीगढ़, 18 मई- हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में विकास एवं पंचायत विभाग के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस प्रस्ताव के तहत, हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (HSRLM) के साथ पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को डेयरी फार्मिंग के उद्देश्य से ‘शामलात देह’ (सामुदायिक) भूमि उपलब्ध कराई जाएगी।

 

इस उद्देश्य के लिए कैबिनेट ने ‘हरियाणा ग्राम सांझी भूमि (विनियमन) नियम, 1964’ के नियम 6 में संशोधन को संबंधित नियमों और शर्तों के साथ मंजूरी दे दी है।

 

संशोधित प्रावधानों के बाद, ग्राम पंचायतों को हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ पंजीकृत स्वयं सहायता समूहों और स्वयं सहायता समूहों की सहकारी समितियों को डेयरी स्थापित करने के लिए 500 वर्ग गज तक की ‘शामलात देह’ भूमि पट्टे पर देने की अनुमति होगी। यह पट्टा शुरू में दो साल की अवधि के लिए दिया जाएगा, और डेयरी के संतोषजनक संचालन के आधार पर (जैसा कि हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा प्रमाणित किया जाएगा), इसे और तीन साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।

 

हालाँकि, पट्टे की कुल अवधि पाँच साल से अधिक नहीं होगी। इस नीति को स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि वे डेयरी इकाइयों का सफलतापूर्वक संचालन करने के बाद अंततः स्वतंत्र रूप से अपनी भूमि खरीद सकें।

 

शुरुआती दो साल की अवधि के बाद पट्टे की अवधि बढ़ाने के लिए, संबंधित उपायुक्त (Deputy Commissioner) की पूर्व मंजूरी अनिवार्य होगी। उपायुक्त ही ग्राम पंचायतों को ऐसी भूमि पट्टे पर देने के लिए मंजूरी प्रदान करने हेतु सक्षम प्राधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।

 

संशोधित नीति में आगे यह भी निर्धारित किया गया है कि स्वयं सहायता समूहों के सदस्य उसी गाँव या ग्राम पंचायत के निवासी होने चाहिए। इसके अलावा, कोई भी स्वयं सहायता समूह भूमि आवंटन के लिए तब तक पात्र नहीं होगा, जब तक कि उसके किसी सदस्य या उनके परिवार के सदस्यों (जैसा कि ‘परिवार पहचान पत्र’ – PPP के माध्यम से पहचाना गया हो) के पास 500 वर्ग गज या उससे अधिक की अपनी निजी भूमि न हो।

 

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हरियाणा मंत्रिमंडल ने अभिलेखागार विभाग सेवा नियमों में संशोधन को दी मंजूरी

चंडीगढ़, 18 मई –हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा अभिलेखागार विभाग (ग्रुप-बी) सेवा नियम, 1992 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई।

संशोधित नियमों के तहत “डिप्लोमा इन आर्काइव्स कीपिंग” की योग्यता के स्थान पर “डिप्लोमा इन आर्काइव्स कीपिंग अथवा डिप्लोमा इन आर्काइवल स्टडीज़ अथवा डिप्लोमा इन आर्काइव्स एंड रिकॉर्ड मैनेजमेंट अथवा उसके समकक्ष मान्यता प्राप्त डिप्लोमा” को शामिल किया गया है।

इसके अतिरिक्त, अभ्यर्थियों के लिए मैट्रिक स्तर तक हिंदी या संस्कृत का ज्ञान होना अथवा उच्च शिक्षा में हिंदी विषय का अध्ययन किया होना अनिवार्य होगा।

यह संशोधन विभाग को वर्तमान रिक्त पदों को भरने में सहायता करेगा तथा समकक्ष डिप्लोमा योग्यताओं को मान्यता देकर सहायक निदेशक के पद के लिए पात्र अभ्यर्थियों के दायरे का विस्तार करेगा।

संशोधित प्रावधान हरियाणा सरकार के राजपत्र (ऑफिशियल गजट) में प्रकाशित होने के तुरंत बाद प्रभावी हो जाएंगे।

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हरियाणा मंत्रिमंडल ने नगर पालिका सीमा के भीतर पुनर्वास योजना में स्थित औद्योगिक भूखंडों के नए उप-विभाजन तथा पहले से अवैध रूप से उप-विभाजित औद्योगिक भूखंडों के नियमितीकरण के लिए नीति को मंजूरी दी

चंडीगढ़, 18 मई – हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज चंडीगढ़ में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिसमें इंडस्ट्रियल प्लॉट्स के नए सब-डिवीजन और नगर निगम सीमा के अंदर पुनर्वास योजना में मौजूद गैर-कानूनी सब-डिवाइडेड इंडस्ट्रियल प्लॉट्स को रेगुलर करने के लिए एक पॉलिसी बनाने का प्रस्ताव है।

यह नीति उन औद्योगिक भूखंड मालिकों पर लागू होगी, जो नए उप-विभाजन की अनुमति प्राप्त करना चाहते हैं तथा उन औद्योगिक भूखंडों को नियमित करवाना चाहते हैं, जिन्हें पहले ही अवैध रूप से उप-विभाजित किया जा चुका है। ये भूखंड नगर पालिका सीमा के भीतर भारत सरकार के पुनर्वास मंत्रालय द्वारा विकसित पुनर्वास योजना क्षेत्रों में स्थित हैं।

नीति के अनुसार, मूल औद्योगिक भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल एक एकड़ होना चाहिए तथा उसका संपर्क कम से कम 12 मीटर चौड़ी मौजूदा सड़क से होना आवश्यक है। प्रत्येक उप-विभाजित अथवा नए उप-विभाजित भूखंड का न्यूनतम आकार 500 वर्ग गज से कम नहीं होगा।

इसके अतिरिक्त, सभी उप-विभाजित भूखंडों में हरियाणा बिल्डिंग कोड-2017 के प्रावधानों के अनुरूप परिसर के भीतर पार्किंग सुविधा उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।

नए उप-विभाजन अथवा पहले से अवैध रूप से उप-विभाजित भूखंडों के नियमितीकरण के इच्छुक आवेदकों को अपना आवेदन संबंधित नगर निगम क्षेत्रों में आयुक्त, नगर निगम तथा नगर परिषद या नगर समिति क्षेत्रों में जिला नगर आयुक्त को प्रस्तुत करना होगा।

आवेदन प्राप्त होने के बाद संबंधित प्राधिकारी निर्धारित नीति मानकों के अनुसार मामले की जांच करेगा और आवेदन प्राप्ति की तिथि से 60 दिनों के भीतर निर्णय लेगा।

आवेदक को समय-समय पर जारी नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) तथा हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी सभी निर्देशों, मानकों और दिशानिर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य होगा।

सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति, सक्षम प्राधिकारी द्वारा आदेश जारी किए जाने की तिथि से 60 दिनों के भीतर शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक के समक्ष अपील दायर कर सकेगा।

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हरियाणा मंत्रिमंडल ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (ग्रुप-बी) राज्य सेवा विनियम, 1999 में संशोधन को दी मंजूरी

 

एचपीएससी के लिए सुपरिंटेंडेंट के दो तथा अकाउंट्स ऑफिसर के एक पद को स्वीकृति दी

 

अब दसवीं कक्षा तक हिंदी या संस्कृत में से किसी एक विषय का होना पर्याप्त होगा

 

चंडीगढ़, 18 मई- मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में सोमवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा लोक सेवा आयोग (ग्रुप-बी) राज्य सेवा विनियम, 1999 में संशोधन को मंजूरी प्रदान की गई। यह बदलाव मौजूदा नियमों को नई स्वीकृत पद संख्या और वर्तमान सरकारी नियमों के अनुसार अपडेट करने के लिए किया गया है।

 

यह निर्णय हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) में परीक्षाओं तथा अन्य संबंधित कार्यों की संख्या में वृद्धि के कारण आयोग पर बढ़ते कार्यभार को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

 

संशोधन के तहत एचपीएससी में सुपरिंटेंडेंट के दो नए पद और अकाउंट्स ऑफिसर का एक नया पद जोड़ा जाएगा। इसके बाद सुपरिंटेंडेंट पदों की संख्या 5 से बढ़कर 7 हो जाएगी, जबकि अकाउंट्स ऑफिसर के एक पद को भी शामिल किया गया है।

 

मंत्रिमंडल ने सेवा नियमों में भी कुछ बदलावों को मंजूरी दी है, ताकि वे वर्तमान सरकारी नीतियों और नियमों के अनुरूप हो सकें। पात्रता, अनुशासन और सजा से जुड़े प्रावधानों को हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के अनुरूप किया गया है।

 

इसके अलावा हिंदी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़ा नियम भी बदला गया है। पहले दसवीं कक्षा तक हिंदी विषय में पढ़ाई अनिवार्य थी लेकिन अब दसवीं कक्षा में हिंदी या संस्कृत में से कोई एक विषय होना या उच्च शिक्षा में हिंदी विषय होना पर्याप्त माना जाएगा।

 

इन बदलावों से एचपीएससी का प्रशासनिक कामकाज और मजबूत होगा तथा राज्य में ग्रुप-ए और ग्रुप-बी पदों की भर्ती प्रक्रिया अधिक प्रभावी और तेज बनेगी।

 

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चंडीगढ़, 18 मई – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत हिसार एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर के विकास हेतु हरियाणा के नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में 2988 एकड़ भूमि के हस्तांतरण पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ए के अनुच्छेद 23(ए) के तहत देय स्टाम्प शुल्क तथा पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 78 एवं 79 के तहत देय पंजीकरण शुल्क को माफ करने की मंजूरी दी गई।

 

अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत हिसार एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) विकसित करने के उद्देश्य से कुल 2988 एकड़ भूमि, जिसमें प्रथम चरण में 1605 एकड़ तथा द्वितीय चरण में 1383 एकड़ भूमि शामिल है, हरियाणा के नागरिक उड्डयन विभाग द्वारा विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) अर्थात नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने का प्रस्ताव है। इस हस्तांतरण पर भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 तथा पंजीकरण अधिनियम, 1908 के प्रावधानों के तहत स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क में छूट/माफी प्रदान की जाएगी।

 

हरियाणा के नागरिक उड्डयन विभाग से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ है, जिसमें अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के तहत हिसार एयरपोर्ट पर इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) के विकास के लिए विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) अर्थात नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के पक्ष में 2988 एकड़ भूमि — जिसमें प्रथम चरण में 1605 एकड़ तथा द्वितीय चरण में 1383 एकड़ भूमि शामिल है — के हस्तांतरण पर स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क में छूट/माफी प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।

 

स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क को माफ करने से लगभग 132.41 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रभाव पड़ेगा, जिसमें लगभग 131.91 करोड़ रुपये स्टाम्प शुल्क तथा 50 हजार रुपये पंजीकरण शुल्क शामिल हैं, जिन्हें माफ किया जाना है।

 

हिसार एयरपोर्ट पर प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को एक बड़े औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित किए जाने की परिकल्पना की गई है, जिससे योजनाबद्ध औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा, घरेलू एवं विदेशी निवेश आकर्षित होंगे, बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा क्षेत्र एवं राज्य के आर्थिक विकास को मजबूती मिलेगी।

 

यह परियोजना हरियाणा में कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर तथा व्यापार सुगमता को भी बढ़ावा देने की संभावना रखती है। चूंकि भूमि का हस्तांतरण एक सरकारी विभाग द्वारा विशेष रूप से AKIC परियोजना के क्रियान्वयन हेतु एक सरकारी समर्थित विशेष प्रयोजन वाहन के पक्ष में किया जाना प्रस्तावित है, इसलिए स्टाम्प शुल्क एवं पंजीकरण शुल्क लगाए जाने से परियोजना पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, जबकि व्यावहारिक रूप से राज्य को इससे कोई अतिरिक्त राजस्व लाभ प्राप्त नहीं होगा। ऐसे में शुल्क में छूट/माफी प्रदान करने से परियोजना का सुचारु एवं किफायती क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा तथा औद्योगिक कॉरिडोर परियोजना के समयबद्ध कार्यान्वयन को समर्थन मिलेगा।

 

उल्लेखनीय है कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 9 के अंतर्गत राज्य सरकार को ऐसे शुल्कों में आंशिक अथवा पूर्ण माफी प्रदान करने का अधिकार प्राप्त है। यह प्रावधान सरकार को भविष्य अथवा पूर्व प्रभाव से देय शुल्क को कम करने अथवा माफ करने की शक्ति प्रदान करता है।

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