Haryana News:हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने ‘ज्ञान भारतम’ पहल के कार्यान्वयन और राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव आज यहां उपायुक्तों, विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रारों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर ‘ज्ञान भारतम’ पहल के कार्यान्वयन और राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण की समीक्षा कर रहे थे।श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें भारत की ज्ञान परंपरा के संरक्षण, नवाचार और अनुकूलन को प्रमुख स्तंभ माना गया है। सितंबर 2025 में शुरू किया गया ‘ज्ञान भारतम’ पोर्टल आधुनिक तकनीक की मदद से सदियों पुरानी पांडुलिपियों की पहचान और संरक्षण के उद्देश्य से विकसित किया गया है।श्री रस्तोगी ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि हर जिले में व्यवस्थित और समयबद्ध सर्वे सुनिश्चित किया जाए। इस सर्वे में संस्थानों के साथ-साथ मंदिरों, विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों और निजी संग्रहकर्ताओं के पास उपलब्ध पांडुलिपियों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि व्यापक राष्ट्रीय डाटाबेस तैयार करने के लिए उचित दस्तावेजीकरण, सूचीकरण और मानकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना आवश्यक है।कार्य योजना की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने बताया कि सर्वेक्षण एक संरचित प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
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इसमें पांडुलिपियों और संरक्षकों की पहचान, भौतिक सत्यापन एवं स्थिति का आकलन, विस्तृत सूचीकरण और मेटाडाटा तैयार करना, संरक्षण एवं उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटाइजेशन तथा अंत में प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए रिपॉजिटरी स्तर पर सत्यापन शामिल होगा।तकनीक की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि उच्च स्तरीय स्कैनर, मेटाडाटा निर्माण और क्लाउड स्टोरेज के साथ सुरक्षित राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी में डिजिटाइज्ड पांडुलिपियों को अपलोड किया जाएगा। इसके साथ ही प्राचीन ग्रंथों को अधिक सुलभ बनाने के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन और हैंडरिटन टेक्स्ट रिकग्निशन जैसी उन्नत तकनीकों का भी उपयोग किया जाएगा।क्षमता निर्माण के महत्व पर बल देते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि संरक्षण कार्य के लिए विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही प्राचीन लिपियों में विशेष प्रशिक्षण देकर कुशल मानव संसाधन तैयार किया जा रहा है।उन्होंने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत बनाने पर बल देते हुए कहा कि राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की निगरानी में तथा जिला स्तर पर उपायुक्तों की अध्यक्षता में समितियां गठित की गई हैं। उन्होंने प्रगति की निगरानी और समस्याओं के समाधान के लिए नियमित और पखवाड़ा समीक्षा बैठकें आयोजित करने के निर्देश दिए।
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उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जून माह तक फील्ड सर्वे पूरा किया जाए। इसके लिए पूर्व-सर्वे समन्वय और निरंतर निगरानी की व्यवस्था की जाए।जनभागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालयों, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थानों, मीडिया विज्ञापनों तथा विशेषज्ञ नेटवर्क के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने अभिलेख दान अभियान और धरोहरशास्त्री इंटर्नशिप कार्यक्रम जैसी पहलों की भी समीक्षा की। इन पहलों का उद्देश्य स्वैच्छिक अभिलेख दान को प्रोत्साहित करना और छात्रों को अभिलेखीय कार्यों से जोड़ना है।श्री रस्तोगी ने कहा कि इस पहल से व्यापक पांडुलिपि डेटाबेस तैयार होगा, दुर्लभ और लुप्तप्राय पांडुलिपियों की पहचान होगी, जीआईएस आधारित राष्ट्रीय रिपॉजिटरी विकसित होगी और भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा के संरक्षण में संस्थागत और सामुदायिक भागीदारी मजबूत होगी।बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री ए.के. सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए, जबकि अभिलेखागार विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री शेखर विद्यार्थी, निदेशक डॉ. बलप्रीत सिंह, उपनिदेशक अभिलेखागार मंजू यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे ।
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