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मुख्यमंत्री ने बागवानी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए खोला घोषणाओं का पिटारा

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👉बागवानी विश्वविद्यालय में पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, पौध कीट नियंत्रण और रोगों के नए विषयों पर भी मास्टर डिग्री और पी.एच.डी. की होगी शुरुआत: नायब सिंह सैनी
👉किसानों की आय बढ़ाने के लिए वर्ष 2030 तक बागवानी क्षेत्र को दोगुना व उत्पादन को तीन गुणा करने का लक्ष्य: नायब सिंह सैनी
👉बागवानी विज्ञानिकों व प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित
Haryana News:हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने बागवानी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए घोषणाओं का पिटारा खोलते हुए कहा कि पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन, पौध कीट नियंत्रण और रोगों के नए विषयों पर भी मास्टर डिग्री और पी.एच.डी. की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने 14 हॉर्टिकल्चर साइंस सेंटर महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय को समर्पित किए और कहा कि ये केंद्र किसानों तक नवीनतम तकनीकों व गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री पहुंचाने और वैज्ञानिक परामर्श देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।मुख्यमंत्री आज महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल व लेफ्टिनेंट अमित मेमोरियल फाउंडेशन की ओर से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। यह राष्ट्रीय सम्मेलन अमृतकाल में बागवानी फसलों के लिए गुणवत्ता युक्त बीज एवं रोपण सामग्री का रणनितिक प्रतिमान विषय पर आधारित है।मुख्यमंत्री ने इस समारोह में बागवानी वैज्ञानिक व प्रगतिशील किसानों को शील्ड, शाल व प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया। समारोह में बागवानी विश्वविद्यालय के उप कुलपति डा. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने मुख्यमंत्री, विधायकगण व अन्य अतिथियों को महाराणा प्रताप की मूर्ति भेट कर सम्मानित किया।उन्होंने इस अवसर पर अपने सम्बोधन कहा कि भारत विश्व में फलों व सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। देश में प्रतिवर्ष लगभग 360 मिलियन टन से अधिक बागवानी उत्पादन होता है। आज भारत आम, केला, अमरूद, अनार जैसे फलों और आलू, प्याज सहित कई अन्य सब्जियों के उत्पादन में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है। लेकिन, यह भी सच है कि उत्पादन के बावजूद गुणवत्ता, ग्रेडिंग, रोगमुक्त पौध सामग्री और पोस्ट-हार्वेस्ट प्रबंधन की कमी के कारण हमें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

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उन्होंने बताया कि महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर का शिलान्यास स्वयं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 9 दिसंबर, 2024 को किया गया था। इतने कम समय में इस विश्वविद्यालय ने जो मुकाम हासिल किया है वह असाधारण है।शिक्षा हो, अनुसंधान हो या किसान सेवा हर क्षेत्र में इस संस्थान ने अपनी अलग पहचान बनाई है। यहाँ विकसित तकनीकें, यहाँ के प्रशिक्षण कार्यक्रम और किसानों के साथ निरंतर संवाद यह सब मिलकर हरियाणा की बागवानी क्रांति को एक नई ऊर्जा, एक नई रफ्तार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समस्त राष्ट्र के समक्ष विकसित भारत 2047 का एक महान संकल्प रखा है और यह संकल्प केवल आर्थिक विकास का नहीं है – यह आत्मनिर्भर कृषि का संकल्प है, पोषण सुरक्षा का संकल्प है, वैज्ञानिक नवाचार का संकल्प है और करोड़ों किसानों की समृद्धि का संकल्प है।मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरी दुनिया इस बात को स्वीकार कर रही है कि गुणवत्तायुक्त बीज और पौध से कृषि उत्पादकता में 15 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। इसलिए गुणवत्तायुक्त पौध सामग्री, वैज्ञानिक प्रबंधन और आधुनिक सप्लाई चेन पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत और वैज्ञानिकों के अनुसंधान ने देश को खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बनाया है। लेकिन, आज समय की मांग बदल रही है। छोटी भूमि जोतों, घटते जल स्तर, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती लागतों के बीच केवल पारंपरिक खेती से किसानों की आय में वृद्धि संभव नहीं है। इसलिए फसल विविधीकरण और बागवानी आधारित कृषि मॉडल, भविष्य में किसानों की खुशहाली का रास्ता बनकर उभर रहे हैं।उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र में किसानों के हित के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चलाई हैं। किसानों की आय बढ़ाने के लिए वर्ष 2030 तक बागवानी क्षेत्र को दोगुणा व उत्पादन को तीन गुणा करने का लक्ष्य रखा है। बागवानी के लिए प्रदेश में 13 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि सब्जियों व फलों के लिए भावांतर भरपाई योजना में 21 बागवानी फसलों के संरक्षित मूल्य निर्धारित किए हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वित्त वर्ष के बजट में सभी जिलों में स्मार्ट बागवानी तकनीकों जैसे संरक्षित खेती एरोपोनिक्स, हाइड्रोपोनिक्स, ग्रीन हाउस, वर्टिकल फार्मिंग व ई-पेस्ट के अंतर्गत कुल 1,000 एकड़ क्षेत्र को लाने का भी प्रावधान किया है। प्रदेश में ग्रामीण हाट मंडियां स्थापित की जाएगी, जिन्हें किसान उत्पादक संगठनों के पैक हाउसेस से लिंक किया जाएगा।

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पहली ग्रामीण हाट मंडी का उद्घाटन किसान दिवस के मौके पर 23 दिसंबर, 2026 को किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 में बागवानी फसलों के पंजीकरण के लिए मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल को पूरे वर्ष संचालित किया जाएगा।एक कोल्ड चेन नीति लागू कर भंडारण, मूल्य स्थिरता तथा निर्यात बढ़ोतरी लाने का भी प्रस्ताव किया गया है।उन्होंने कहा कि टिश्यू कल्चर के माध्यम से पैदा किए गए आलू बीज की श्रृंखला का प्रमाणीकरण करने के लिए एक हरियाणा आलू बीज अधिनियम लाया जाएगा। इस अधिनियम के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 7.5 लाख क्विंटल उच्च गुणवत्ता युक्त बीज आलू का उत्पादन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिला सोनीपत, पानीपत, अंबाला, करनाल व कुरूक्षेत्र मशरूम उत्पादन में अग्रणी है।इन जिलों में मशरूम उत्पादन व मूल्य संवर्धन को व्यापक स्तर पर और बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बागवानी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय से संबंद्ध रीजनल रिसर्च सेंटर की स्थापना अंबाला के चाणसौली में की जाएगी।मुख्यमंत्री ने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि उनको ऐसे बीज और पौध सामग्री विकसित करनी होगी जो कम पानी में अधिक उत्पादन दें, रोग प्रतिरोधक हों, अधिक पोषक हो और बदलती जलवायु के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिक इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य कर भी रहे हैं। टिश्यू कल्चर, माइक्रो-प्रोपेगेशन, जर्मप्लाज्म संरक्षण, वायरस-फ्री प्लांटिंग मैटेरियल, हाई-यील्डिंग वैरायटी और जैविक पौध संरक्षण तकनीकों पर लगातार शोध हो रहा है। आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फारमेशी सेंसर टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी बागवानी क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाले हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इन तकनीकों का लाभ केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहे, बल्कि अंतिम पंक्ति में खड़े अंतिम किसान तक पहुंचे। किसान तभी समृद्ध होगा जब उसे गुणवत्तापूर्ण बीज व पौध सामग्री समय पर और उचित कीमत पर उपलब्ध होंगे।उन्होंने कहा कि यदि भारत को वैश्विक बागवानी निर्यात शक्ति बनना है तो हमें उत्पादन के साथ साथ गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास हैै कि इस राष्ट्रीय सम्मेलन में होने वाला विचार-मंथन देश की बागवानी नीति को नई दिशा देगा, अनुसंधान को नई ऊँचाई देगा और करोड़ों किसानों के हित में नए द्वार खोलेगा।

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यहाँ से जो संकल्प निकलेगा- वह संकल्प केवल इस सभागार तक सीमित नहीं रहेगा, वह देश के खेत-खलिहानों तक पहुंचेगा, किसान के जीवन में बदलाव लाएगा।इस अवसर पर महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चर यूनिवर्सिटी करनाल के कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने मुख्य अतिथि श्री नायब सिंह सैनी का स्वागत किया। इस अवसर पर एएसआरबी के चेयरमैन डॉ. संजय कुमार , भारतीय उद्यानिकी संघ परिसंघ (चाय) डॉ एच.पी. सिंह, डॉ. पाठक ने भी विचार रखे।समारोह के दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सैनी द्वारा वीएनएमकेवी परभणी एमएच के कुलपति प्रो. इंद्र मणि मिश्रा को लाइफ टाइम रिकग्निशन अवार्ड-2026, कावेरी विश्वविद्यालय तेलगांना के कुलपति प्रो.वी प्रवीन राव को अमित कृषि ऋषि पुरस्कार-2026, एएसआरबी के चेयरमैन डॉ. संजय कुमार को अमित प्रबुद्ध मनीषी पुरस्कार-2026 देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने उद्यान रत्न पुरस्कार-2026 से नितिन ललित, इनोवेटिव सजावटी बागवानी उद्यमी, करनाल,नवीन कुमार, प्रगतिशील सब्जी उत्पादक, दलवा, झज्जर, वीरेंद्र बाजवान, इनोवेटिव मशरूम उत्पादक, बाजवान, बडियाल, पंचकुला, कुलदीप आर्य, प्रगतिशील फल एवं सब्जी उत्पादक, नारनौद, हांसी को सम्मानित किया इस अवसर पर इंद्री के विधायक एवं चीफ व्हिप श्री रामकुमार कश्यप, नीलोखेड़ी के विधायक श्री भगवानदास कबीरपंथी, करनाल के विधायक श्री जगमोहन आनंद के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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