Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट मीटिंग में हरियाणा लोकल ऑडिट एक्ट, 2026 के ड्राफ्ट को मंज़ूरी दी गई। प्रस्तावित एक्ट का उद्देश्य राज्य में सभी लोकल अथॉरिटी और दूसरी अथॉरिटी बॉडी, इंस्टीट्यूशन और फंड के लिए एक प्रभावी और कुशल ऑडिट कानून बनाना है तथा इससे या इनसे जुड़े मामलों के लिए भी प्रावधान करना है।कई राज्यों के लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट (जिसे लोकल फंड डिपार्टमेंट भी कहा जाता है) के अपने अधिनियम और नियम हैं। जैसे, तमिलनाडु लोकल फंड ऑडिट एक्ट, 2014, तमिलनाडु लोकल फंड ऑडिट रूल्स, 2016, गुजरात लोकल फंड ऑडिट एक्ट, 1963, गुजरात लोकल फंड ऑडिट रूल्स, 1974, केरल लोकल फंड ऑडिट एक्ट, 1994 आदि।भारत के दूसरे राज्यों के लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट के एक्ट/रूल्स और लोकल फण्ड डिपार्टमेंट हरियाणा के कामकाज को देखते हुए सभी लोकल अथॉरिटी और दूसरी अथॉरिटीज, बॉडी या इंस्टीट्यूशन और उनसे जुड़े फंड और मामलों के लिए प्रभावी और कुशल ऑडिट सिस्टम बनाने के लिए विभाग को एक एक्ट तैयार करने की भी ज़रूरत है।एक खास लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट एक्ट बनाने का मुख्य उद्देश्य एक मज़बूत कानूनी ढांचा तैयार करना है जो लोकल ऑडिट डिपार्टमेंट को लोकल बॉडी और दूसरे लोकल फंड वाली इंस्टीट्यूशन का स्वतन्त्र रूप और प्रभावी करने का अधिकार देता है। ऑडिटर के सामने रिकॉर्ड पेश करने के लिए मजबूर करने या जवाबदेही तय करने हेतू मज़बूत कानूनी शक्तियों की ज़रूरत है। लोकल अथॉरिटीज़ को यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानूनी सिस्टम बनाना है तकि ऑडिट पैरा का तय समय में जवाब दें सके।यह अधिनियम लोकल ऑडिट के डायरेक्टर को वितिय गड़बड़ियों के लिए सीधे ज़िम्मेदार लोगों को सरचार्ज नोटिस जारी करने का कानूनी अधिकार देगा। यह एक्ट ऑडिट फ्रेमवर्क को लोकल पॉलिटिकल या एडमिनिस्ट्रेटिव दखल से बचाने के लिए कानूनी सपोर्ट देगा। यह राज्य विधानसभा को सालाना ऑडिट रिपोर्ट जमा करने के लिए कानूनी समय सीमा तय करता है, जिससे पारदर्शी सुनिश्चित होती है।
👉पीएमएवाई-यू 2.0 के लाभार्थियों को बड़ी राहत, हरियाणा सरकार ने स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में की कटौती
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के अंतर्गत स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में छूट तथा निश्चित शुल्क निर्धारित करने संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।यह निर्णय प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पंजीकृत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लाभार्थियों के लिए पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत 60 वर्गमीटर तक के पात्र आवासीय इकाइयों पर लागू होगा। स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में छूट, समयबद्ध और महत्वाकांक्षी अभियान के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में घर खरीदने की प्रक्रिया को अधिक सरल बनाना है।प्रस्ताव के अनुसार, पात्र आवासीय इकाइयों के लिए कन्वेयंस डीड (स्वामित्व हस्तांतरण दस्तावेजों) पर प्रति दस्तावेज 500 रुपये शुल्क लिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की अनुसूची-1ए के अनुच्छेद 23-ए, जो हरियाणा में लागू है, के अंतर्गत देय स्टांप ड्यूटी भी घटाकर 500 रुपये प्रति दस्तावेज कर दी गई है।इस निर्णय से ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लाभार्थियों पर आवास खरीद से संबंधित लेन-देन व वित्तीय बोझ कम होगा। इससे पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत ‘‘सभी के लिए आवास’’ के लक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में हरियाणा में कन्वेयंस डीड पर भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की अनुसूची-1ए के अनुच्छेद 23-ए के तहत 5 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी तथा 2 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क देय है। यदि संपत्ति का हस्तांतरण किसी महिला के पक्ष में किया जाता है तो 2 प्रतिशत की छूट उपलब्ध है। वहीं, पंजीकरण शुल्क स्लैब के आधार पर निर्धारित किया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा 50,000 रुपये है।प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत पात्र ईडब्ल्यूएस लाभार्थियों के लिए किफायती आवास को बढ़ावा देने के स्टांप ड्यूटी एवं पंजीकरण शुल्क में यह विशेष रियायत प्रदान कर किफायती आवास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, पात्र कन्वेयंस डीड पर स्टाम्प डयूटी पंजीकरण शुल्क में छूट को स्वीकृति प्रदान की गई है।
👉रेवाड़ी में बनेगी कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी;इसका उद्देश्य हायर एजुकेशन की क्षमता बढ़ाना
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई कैबिनेट की मीटिंग में हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ एक्ट, 2006 में संशोधन करके, कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, रेवाड़ी नाम से एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने के लिए बिल लाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई। इस एक्ट को हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ (संशोधित) एक्ट, 2026 कहा जा सकता है।राज्य के युवाओं के लिए हायर एजुकेशन के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन बनाने और उन्हें बढ़ाने की ज़रूरत है। हायर एजुकेशन में विद्यार्थियों की बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी को समायोजित करने और नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, 2020 के अनुसार 50 प्रतिशत ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो के लक्ष्य को पार करने के लिए हमें 2030 तक सभी स्तर पर संस्थानों की संख्या लगभग दोगुनी करनी होगी। हायर एजुकेशन में इस बेंचमार्क को पूरा करने के लिए सरकारी दखल काफी नहीं होगा। हमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को बड़े पैमाने पर शामिल करने की ज़रूरत है। हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ एक्ट, 2006 असल में हायर एजुकेशन में कैपेसिटी बढ़ाने और इसके स्टैंडर्ड को बेहतर बनाने में सरकार की पहल को सहयोग करने के लिए प्राइवेट सेक्टर को शामिल करने के लिए लाया गया है।अधिनियम अनुसार उद्देश्य को पाने के लिए मंत्री परिषद ने रेवाड़ी में कुसुम इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी बनाने के लिए एक बिल लाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है।
👉पूर्व अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत होरिजेंटल आरक्षण का दायरा बढ़ाया
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के निवासी पूर्व अग्निवीरों को प्रत्यक्ष भर्ती में अग्निशमन सेवा विभाग में फायर ऑपरेटर- कम -ड्राइवर, पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग में वाइल्डलाइफ गार्ड तथा गृह विभाग के अंतर्गत भारतीय रिजर्व बटालियन (आईआरबी) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) में कांस्टेबल के पदों पर 20 प्रतिशत होरिजेंटल आरक्षण प्रदान करने को मंजूरी दी गई।भारत सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सशस्त्र बलों में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले प्रशिक्षित अग्निवीरों को भविष्य में सार्थक रोजगार के अवसर मिलें। यह पहल अग्निपथ योजना के दीर्घकालिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाते हुए उन्हें सरकारी सेवाओं में रोजगार का स्पष्ट अवसर प्रदान करती है।
इससे पहले हरियाणा सरकार पूर्व अग्निवीरों को ग्रुप-‘सी’ पदों, जैसे पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग में फॉरेस्ट गार्ड, कारागार विभाग में वार्डर तथा खान एवं भू-विज्ञान विभाग में ग्रुप-‘डी’ के माइनिंग गार्ड के पदों पर 20 प्रतिशत होरिजेंटल आरक्षण प्रदान कर चुकी है।इसके अलावा राज्य सरकार पहले ही पूर्व अग्निवीरों को ग्रुप-‘बी’ के पदों पर 1 प्रतिशत, ग्रुप-‘सी’ के पदों पर 5 प्रतिशत, पुलिस विभाग में कांस्टेबल के पदों पर 20 प्रतिशत तथा फॉरेस्ट गार्ड, जेल वार्डर और माइनिंग गार्ड के पदों पर 20 प्रतिशत आरक्षण उपलब्ध करवा चुकी है। उल्लेखनीय है कि फॉरेस्ट गार्ड, जेल वार्डर और माइनिंग गार्ड के पदों पर आरक्षण को पहले के 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया गया है।इसके बाद भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने गृह विभाग के अंतर्गत राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और भारतीय रिजर्व बटालियन (आईआरबी), अग्निशमन सेवा विभाग में फायर ऑपरेटर- कम -ड्राइवर तथा पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग में वाइल्डलाइफ गार्ड के पदों पर भी पूर्व अग्निवीरों को 20 प्रतिशत होरिजेंटल आरक्षण का लाभ देने का सुझाव दिया। मंत्रिमंडल की मंजूरी के साथ इन सिफारिशों को लागू किया जाएगा।आईआरबी, एसडीआरएफ, अग्निशमन सेवा विभाग तथा पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग में पूर्व अग्निवीरों को आरक्षण दिए जाने से उन्हें सरकारी रोजगार के अवसर मिलेंगे। साथ ही, राज्य सरकार उनकी सैन्य सेवा के दौरान अर्जित कौशल और प्रशिक्षण का उपयोग इन विशेषीकृत सेवाओं को और मजबूत बनाने में कर सकेगी।यह निर्णय न केवल पूर्व अग्निवीरों के पुनर्वास और सम्मानजनक रोजगार के अवसर सुनिश्चित करेगा, बल्कि राज्य की सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, अग्निशमन सेवाओं और वन्यजीव संरक्षण सेवाओं को भी सुदृढ़ करेगा। साथ ही, यह अग्निपथ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को बढ़ावा देगा और सैन्य सेवा पूरी करने के बाद पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में सहज कैरियर परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगा।
👉हरियाणा कैबिनेट ने आबादी देह क्षेत्रों में स्वामित्व अधिकारों को दर्ज करने और उनके निपटारे के नियमों को दी मंजूरी
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहां हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में ‘हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अंकन और निपटारा) अधिनियम, 2025’ के तहत बनाए गए ‘हरियाणा आबादी देह (स्वामित्व अधिकारों का निहित होना, अंकन और निपटारा) नियम, 2026’ को स्वीकृति प्रदान की गई।ये नियम अधिनियम को व्यावहारिक रूप देने और पूरे राज्य में आबादी देह (लाल डोरा) क्षेत्रों के भीतर स्थित संपत्तियों के स्वामित्व अधिकारों को दर्ज करने, निहित करने तथा उनका निपटारा करने के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित करने के उद्देश्य से स्वीकृत किए गए हैं।यह निर्णय ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्रों में संपत्ति धारकों को कानूनी स्पष्टता प्रदान करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जहां लंबे समय से कब्जा होने के बावजूद ऐतिहासिक रूप से स्वामित्व अधिकार दर्ज नहीं रहे हैं। ये नियम अधिकारों के स्थाई रिकॉर्ड तैयार करने की सुविधा प्रदान करेंगे और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार स्वामित्व निर्धारित करने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराएंगे।नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि स्वामित्व अधिकारों के निर्धारण की प्रक्रिया संक्षिप्त (समरी) कार्यवाहियों के माध्यम से की जाएगी। दावों के निष्पक्ष न्यायनिर्णयन को सुनिश्चित करने के लिए अधिनियम के तहत नामित अधिकारियों को व्यक्तियों को समन भेजने, दस्तावेज़ मंगवाने और साक्ष्य दर्ज करने हेतु सिविल कोर्ट के समान शक्तियां प्रदान की जाएंगी। अधिकारों के प्रारूप रिकॉर्ड (ड्राफ्ट रिकॉर्ड) को प्रकाशित किया जाएगा, हितधारकों से आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा सभी संबंधित पक्षों के हितों की रक्षा के लिए एक प्रभावी अपील एवं पुनरीक्षण (रिवीजन) तंत्र को शामिल किया गया है।यह पहल स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी क्षेत्रों के किए गए सर्वेक्षण और मैपिंग पर आधारित है, जिसे 8 मार्च 2019 को भारतीय सर्वेक्षण विभाग और हरियाणा सरकार के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन के बाद शुरू किया गया था। संपत्तियों की सटीक पहचान और मैपिंग के लिए आधुनिक सर्वेक्षण प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया गया है, जिसने स्पष्ट स्वामित्व रिकॉर्ड स्थापित करने की नींव रखी है।कैबिनेट के इस निर्णय से लाखों ग्रामीण संपत्ति धारकों को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त स्वामित्व रिकॉर्ड मिलने, संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी आने, भूमि प्रशासन के मजबूत होने और संपत्ति के स्वामित्व से जुड़ी वित्तीय व अन्य संस्थागत सेवाओं तक पहुंच में सुधार होने की उम्मीद है।
👉हरियाणा मंत्रिमंडल ने हरियाणा राजस्व पटवारी (समूह-सी) सेवा नियम, 2011 में संशोधनों को दी मंज़ूरी
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा राजस्व पटवारी (समूह-सी) सेवा नियम, 2011 में संशोधनों को मंज़ूरी दे दी गई। इन संशोधनों का उद्देश्य राजस्व पटवारियों के भर्ती और प्रशिक्षण ढांचे का आधुनिकीकरण करना, उनकी सेवा शर्तों में सुधार करना तथा राजस्व प्रशासन को अधिक कुशल और उत्तरदायी बनाना है। संशोधित नियम 1 जनवरी, 2025 से लागू माने जाएंगे।मंत्रिमंडल द्वारा लिया गया एक प्रमुख निर्णय नए नियुक्त पटवारियों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण अवधि को डेढ़ वर्ष से घटाकर एक वर्ष करना है। संशोधित प्रशिक्षण कार्यक्रम में पटवार स्कूल में छह महीने का संस्थागत प्रशिक्षण और उसके बाद छह महीने का फील्ड प्रशिक्षण शामिल होगा। यह निर्णय राज्य स्तरीय पटवारी सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप लिया गया है और इससे फील्ड ड्यूटी के लिए प्रशिक्षित पटवारियों की जल्द उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद है।मंत्रिमंडल ने नए नियुक्त पटवारियों की सेवा शर्तों में महत्वपूर्ण सुधार को भी मंज़ूरी दी। प्रशिक्षण अवधि के दौरान वजीफा (स्टाइपेंड) मिलने के बजाय, अब उन्हें फंक्शनल पे-लेवल-2 (FPL-2) में 19,900 रुपये का शुरुआती वेतन दिया जाएगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने पर, उन्हें पिछले फंक्शनल पे-लेवल-4 के स्थान पर 32,100-1,02,000 रुपये के वेतनमान के साथ फंक्शनल पे लेवल-5A में रखा जाएगा।पेशेवर दक्षता सुनिश्चित करने के लिए, संशोधित नियमों में प्रावधान है कि अस्थायी रूप से नियुक्त प्रत्येक पटवारी को निर्धारित अवधि के भीतर विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए अधिकतम चार अवसर दिए जाएंगे।संशोधित नियमों में यह भी प्रावधान है कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान कोई वार्षिक वेतन वृद्धि (increment) स्वीकार्य नहीं होगी, और पहली वेतन वृद्धि नियमित नियुक्ति का एक वर्ष पूरा होने के बाद ही देय होगी। कर्मचारियों के हित में किए गए एक अन्य उपाय के तहत, उम्मीदवारों को केवल पांच जिलों की वरीयता देने के मौजूदा प्रावधान को बदलकर पदस्थापना के लिए सभी जिलों को चुनने का विकल्प दिया गया है।मंत्रिमंडल ने राजस्व पटवारियों को हरियाणा सिविल सेवाएं (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के प्रावधानों के तहत लाकर अनुशासनात्मक मामलों से संबंधित संशोधनों को भी मंज़ूरी दे दी है, जिसमें सेवा नियमों में संशोधित अनुशासनात्मक और अपीलीय अधिकारियों को निर्दिष्ट किया गया है।इसके अलावा, विभागीय परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को कंप्यूटर अनुप्रयोगों, भूमि अभिलेखों के कंप्यूटरीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियों, डैशबोर्ड, पोर्टल और अन्य डिजिटल गवर्नेंस प्रणालियों को शामिल करने के लिए अपडेट किया गया है, जिससे पटवारी तेजी से प्रौद्योगिकी-संचालित होते राजस्व प्रशासन में अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सकें।
👉हरियाणा कैबिनेट ने स्वास्थ्य विभाग पैरा-मेडिकल और विविध पद (राज्य समूह-सी) सेवा नियम, 1998 में संशोधन को दी मंजूरी
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज यहाँ हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा स्वास्थ्य विभाग पैरा-मेडिकल और विविध पद (राज्य समूह-सी) सेवा नियम, 1998 में संशोधनों को स्वीकृति प्रदान की गई। यह संशोधन मुख्य रूप से सेवा नियमों में वरिष्ठ रेडियोलॉजी अधिकारी के नए बनाए गए 22 पदों को शामिल करने और स्वास्थ्य प्रणाली में रेडियोलॉजी पेशेवरों की बदलती भूमिका के अनुरूप मौजूदा रेडियोग्राफर पदों के नाम को ‘रेडियोलॉजी अधिकारी’ में बदलने का प्रावधान करते हैं।
यह संशोधन 10 जून, 2020 को जारी एक सरकारी अधिसूचना के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक-एक, यानी वरिष्ठ रेडियोग्राफर के 22 पदों के सृजन के बाद आवश्यक हो गए थे। ये पद विभाग में कार्यरत पात्र रेडियोग्राफरों में से पदोन्नति द्वारा भरे जाने हैं।संशोधित नियमों के तहत, 22 स्वीकृत पदों के साथ सेवा नियमों में वरिष्ठ रेडियोलॉजी अधिकारी की एक नई श्रेणी शुरू की गई है। यह पद FPL-6, सेल-I (35,400 रुपये – 1,12,400 रुपये) का वेतनमान वहन करेगा और इसे मुख्य रूप से निर्धारित योग्यताओं और न्यूनतम पांच वर्ष की नियमित सेवा वाले रेडियोलॉजी अधिकारियों में से पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा। निर्धारित पात्रता शर्तों के अधीन किसी भी राज्य सरकार या भारत सरकार की सेवा से स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) के माध्यम से नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।कैबिनेट ने पूरे सेवा नियमों में नियुक्ति, पदोन्नति, अनुशासनात्मक मामलों और सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाले प्रासंगिक परिशिष्टों (appendices) सहित ‘रेडियोग्राफर’ पदनाम को बदलकर ‘रेडियोलॉजी अधिकारी’ करने वाले संशोधनों को भी मंजूरी दे दी है।इसके अलावा, संशोधित नियमों में मौजूदा सरकारी नीतियों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार नियुक्तियों में आरक्षण, सीधी भर्ती में आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए अनुभव में छूट, पात्रता शर्तों और नागरिकता आवश्यकताओं से संबंधित संशोधित प्रावधान शामिल हैं।इन संशोधनों से स्वास्थ्य विभाग में रेडियोलॉजी पेशेवरों के करियर की प्रगति को मजबूती मिलने, सेवा नामकरण में एकरूपता सुनिश्चित होने, समय पर पदोन्नति की सुविधा मिलने और राज्य के स्वास्थ्य कार्यबल को समकालीन चिकित्सा पद्धतियों के साथ संरेखित करने की उम्मीद है, जिससे हरियाणा के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नैदानिक (डायग्नोस्टिक) सेवाओं में सुधार होगा।
👉महिलाओं के नाम वाहन खरीदने पर मोटर वाहन टैक्स में मिलेगी 1 प्रतिशत छूट
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई हरियाणा मंत्रिमंडल की बैठक में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य में महिलाओं के नाम पर खरीदे और पंजीकृत किए जाने वाले 20 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाले गैर-व्यावसायिक (नॉन-ट्रांसपोर्ट) वाहनों पर मोटर वाहन टैक्स में 1 प्रतिशत छूट देने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की।निर्णय के अनुसार, महिलाओं के नाम पर नए पंजीकृत होने वाले गैर-व्यावसायिक वाहनों पर एक्स-शोरूम कीमत के 1 प्रतिशत के बराबर मोटर वाहन टैक्स में छूट दी जाएगी। यह निर्णय मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा को लागू करने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें अपने नाम पर वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना भी है। सरकार का मानना है कि इस टैक्स रियायत से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी को भी बल मिलेगा।उल्लेखनीय है कि हरियाणा मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 2016 के तहत राज्य सरकार विभिन्न श्रेणियों के वाहनों पर मोटर वाहन टैक्स की दरें निर्धारित करती है। वर्तमान में निजी उपयोग के वाहनों पर टैक्स उनकी एक्स-शोरूम कीमत के आधार पर लगाया जाता है। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि बजट में घोषित 1 प्रतिशत टैक्स छूट का लाभ केवल उन गैर-व्यावसायिक वाहनों पर मिलेगा जिनकी एक्स-शोरूम कीमत 20 लाख रुपये तक होगी। यह छूट वर्तमान में लागू मोटर वाहन टैक्स के अतिरिक्त प्रदान की जाएगी।
👉हरियाणा ने 30 लाख रुपये तक के इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी पूर्ण कर छूट
स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हरियाणा मंत्रिमंडल ने राज्य में खरीदे और पंजीकृत किए गए 30 लाख रुपये तक के एक्स-शोरूम मूल्य वाले नए विशुद्ध इलेक्ट्रिक/बैटरी से चलने वाले दो पहिया, तीन पहिया (ऑटो/ई-रिक्शा) और चार पहिया वाहनों के पंजीकरण के समय मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट को मंज़ूरी दे दी है। साथ ही 30 लाख रुपये से अधिक कीमत के इलेक्ट्रिक वाहनों पर 50 प्रतिशत की छूट को भी मंजूरी दी गई।यह निर्णय इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए अधिक प्रोत्साहन प्रदान करने और पूरे राज्य में स्वच्छ व पर्यावरण-अनुकूल मोबिलिटी की दिशा में बदलाव को गति देने के लिए 2 मार्च, 2026 को प्रस्तुत हरियाणा बजट 2026-27 में मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा को पूरा करता है।वर्तमान में, हरियाणा इलेक्ट्रिक/बैटरी चालित वाहनों और सीएनजी (CNG) वाहनों के पंजीकरण पर एकमुश्त मोटर वाहन कर में 20 प्रतिशत की छूट प्रदान करता है। नवीनतम मंज़ूरी के साथ, पात्र इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए मौजूदा छूट को बढ़ाकर 30 लाख रुपये तक के एक्स-शोरूम मूल्य वाले नए विशुद्ध इलेक्ट्रिक/बैटरी चालित दो पहिया, तीन पहिया (ऑटो/ई-रिक्शा) और चार पहिया वाहनों के नए पंजीकरण के लिए पूर्ण (100 प्रतिशत) छूट कर दिया गया है।हालांकि, सीएनजी वाहनों के लिए एकमुश्त मोटर वाहन कर में मौजूदा 20 प्रतिशत की छूट बिना किसी बदलाव के जारी रहेगी।यह निर्णय हरियाणा मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के तहत लिया गया है, जिसके तहत राज्य सरकार को हरियाणा में पंजीकृत और संचालित विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिए मोटर वाहन कर की दरें निर्धारित करने का अधिकार प्राप्त है।इस बढ़ी हुई कर छूट से इलेक्ट्रिक वाहनों को अधिक किफायती बनाकर राज्य में उनकी खरीद और पंजीकरण को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। यह पहल वाहनों के उत्सर्जन को कम करने, प्रदूषण पर अंकुश लगाने, वायु गुणवत्ता में सुधार करने और हरियाणा में पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा देने में भी योगदान देगी।राज्य सरकार का मानना है कि यह कदम हरित विकास और स्वच्छ पर्यावरण के प्रति हरियाणा की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपनाने में तेजी लाएगा।
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