Tuesday, May 19, 2026
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यमुना में गिरने वाले नालों की मैपिंग के लिए होगा जोन-वाइज ड्रोन सर्वे

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👉दिल्ली में प्रदूषित जल प्रवाह रोकने के लिए हरियाणा की विस्तृत कार्ययोजना
👉मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने प्रगति की समीक्षा की

Haryana News: हरियाणा सरकार द्वारा यमुना में गिरने वाले सभी प्रमुख और छोटे नालों की मैपिंग के लिए जोन-वाइज ड्रोन सर्वेक्षण करवाया जाएगा। इसके माध्यम से जल प्रवाह और जल गुणवत्ता, दोनों की निगरानी की जाएगी। यह पहल दिल्ली में किए जा रहे सर्वेक्षणों की तर्ज पर प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान और स्रोत स्तर पर निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है।गौरतलब है कि हरियाणा ने यमुना नदी के पुनरुद्धार तथा अंतरराज्यीय नालों के माध्यम से दिल्ली में पहुंचने वाले प्रदूषित जल को रोकने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना लागू की है। इस योजना के तहत सीवेज उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और नालों की रियल-टाइम निगरानी पर खास जोर दिया जा रहा है।मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने आज यहां राज्य की व्यापक प्रदूषण नियंत्रण रणनीति की समीक्षा की, जिसका उद्देश्य हरियाणा के नालों से यमुना नदी प्रणाली के माध्यम से दिल्ली में प्रवेश करने वाले प्रदूषित जल को रोकना है। बैठक में सीवेज उपचार अवसंरचना को मजबूत करने, बायो कैमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) के स्तर को कम करने तथा औद्योगिक अपशिष्ट के सख्त निरीक्षण पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा सीवरेज और औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में राज्य को जारी निर्देशों की अनुपालना की समीक्षा भी की गई।

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साथ ही हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करने वाले अंतरराज्यीय नालों- ड्रेन नंबर-6, मुंगेशपुर ड्रेन, बुपनिया ड्रेन और पालम विहार ड्रेन आदि के प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर भी चर्चा की गई।हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन श्री विनय प्रताप सिंह ने बताया कि राज्य में वर्तमान में 34 शहरों में 1,518 एमएलडी क्षमता वाले 90 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं। इसके अतिरिक्त 170 एमएलडी क्षमता वाले 4 नए एसटीपी निर्माणाधीन हैं, जबकि 227 एमएलडी क्षमता के 9 एसटीपी को अपग्रेड किया जा रहा है ताकि उपचार क्षमता और दक्षता को बढ़ाया जा सके।औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में राज्य में 184.5 एमएलडी क्षमता वाले 17 कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) कार्यरत हैं। इनमें से 19 एमएलडी क्षमता वाले 2 सीईटीपी को अपग्रेड किया जा रहा है, जबकि औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली को और मजबूत करने के मकसद से 146 एमएलडी क्षमता वाले 8 नए सीईटीपी प्रस्तावित हैं।बैठक में पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री सुधीर राजपाल, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अनुराग अग्रवाल और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव श्री योगेश कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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