ट्रीटेड पानी का वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

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👉हरियाणा के थर्मल पावर प्लांटों तक पहुंचेगा ट्रीटेड पानी, औद्योगिक क्षेत्रों में भी होगा इस्तेमाल
👉एसटीपी और सीटीपी की मैपिंग करके योजना बनाने के मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
Haryana News: हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि ट्रीटेड पानी का वैज्ञानिक और योजनाबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए तो न केवल भूजल और पेयजल स्रोतों पर दबाव कम होगा, बल्कि उद्योगों, ऊर्जा क्षेत्र, हरित क्षेत्रों और कृषि के लिए भी पानी की दीर्घकालिक उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकेगी।मुख्यमंत्री सोमवार देर सांय रीयूज़ ऑफ ट्रीटेड वेस्टवॉटर (टीडब्ल्यूडब्ल्यू) पॉलिसी, हरियाणा से संबंधित विशेष बैठक ले रहे थे। बैठक में प्रदेश के जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री श्री रणबीर गंगवा भी मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) से तय मानकों के अनुरूप ट्रीटेड पानी निकले और उसका अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

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उन्होंने कहा कि ट्रीटेड पानी किसी भी स्थिति में व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। इसके लिए ऐसा मजबूत और सुव्यवस्थित नेटवर्क तैयार किया जाए, जिससे यह पानी थर्मल पावर प्लांटों, ग्रीन बेल्ट, कृषि और अन्य जरुरत वाले क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सके।बैठक के दौरान जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने ट्रीटेड वेस्ट वाटर के दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए चरणबद्ध योजना बनाई है। पहले चरण में 21 जिलों के 35 एसटीपी को शामिल करते हुए 500 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की गई, जिसे नाबार्ड के तहत मंजूरी मिली। इनमें 27 एसटीपी को माइक्रो इरिगेशन के जरिए ट्रीटेड वेस्ट वाटर के दोबारा इस्तेमाल के लिए अंतिम रूप दिया गया है। 19 एसटीपी का काम पूरा हो चुका है, जबकि 8 पर काम चल रहा है। इस परियोजना से करीब 40 हजार एकड़ खेती की जमीन को सिंचाई जल मिलेगा।अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि दूसरे चरण में 57 एसटीपी को शामिल किया गया है। इनमें 13 एसटीपी की क्षमता 157.50 एमएलडी और 44 एसटीपी की क्षमता 370.75 एमएलडी है। फिलहाल राज्य में 207 एसटीपी/सीईटीपी हैं और बाकी प्लांट्स को भी चरणबद्ध तरीके से इस योजना से जोड़ा जाएगा।विभाग ने पहले चरण की परियोजनाएं समय पर पूरी करने, दूसरे चरण के व्यवहारिक एसटीपी विकसित करने और बाकी एसटीपी को भी इस योजना से जोड़ने की तैयारी की है। लक्ष्य है कि विजन@2047 के तहत मार्च 2031 तक राज्य में 100 फीसदी ट्रीटेड वेस्ट वाटर का दोबारा इस्तेमाल किया जाए।

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👉एसटीपी और सीटीपी की मैपिंग की जाएं
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश देते हुए कहा कि प्रदेश में जहां-जहां एसटीपी और सीटीपी स्थापित हैं, उनकी विस्तृत मैपिंग की जाए। प्रत्येक प्लांट की क्षमता, वहां से निकलने वाले ट्रीटेड पानी की मात्रा, उसके संभावित उपयोग और आसपास के क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था का पूरा खाका तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि सही योजना और बेहतर समन्वय के साथ ट्रीटेड पानी का व्यापक स्तर पर उपयोग किया जा सकता है, जिससे भूजल और पेयजल स्रोतों पर दबाव भी कम होगा।उन्होंने निर्देश दिए कि ट्रीटेड पानी के उपयोग में सबसे पहले थर्मल पावर प्लांटों को प्राथमिकता दी जाए। इसके बाद ग्रीन बेल्ट, पार्कों, पौधारोपण और कृषि कार्यों में इसका अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित किया जाए। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी अलग से योजना तैयार की जाए, ताकि उद्योगों में भी ताजे पानी की जगह ट्रीटेड पानी का उपयोग बढ़ाया जा सके।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस पूरी व्यवस्था को स्ट्रीमलाइन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल एक विभाग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, सिंचाई विभाग, शहरी स्थानीय निकाय, उद्योग विभाग, ऊर्जा विभाग और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी संबंधित विभाग संयुक्त रूप से कार्ययोजना तैयार करें। इसके लिए विभागों के वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से बैठक करें और पूरे कार्य की क्लोज मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें।

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👉कॉलोनियों के एसटीपी की होगी जांच
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की सोसायटी कॉलोनियों में स्थापित एसटीपी की भी विशेष जांच की जाएगी। इसके लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ-साथ संबंधित नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिकाओं के अधिकारी संयुक्त रूप से निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निजी कॉलोनियों के एसटीपी से निकलने वाले ट्रीटेड पानी का उपयोग कॉलोनियों की ग्रीन बेल्ट, पार्कों और पौधारोपण में हो। यदि वहां इसकी आवश्यकता नहीं है, तो पाइपलाइन अथवा अन्य उपयुक्त नेटवर्क के माध्यम से इस पानी को खेतों या अन्य जरूरत वाले क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। प्रदेश में लगभग 678 सोसायटी कॉलोनी हैं, जहां इस व्यवस्था की चरणबद्ध समीक्षा की जाएगी।

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