Haryana News: हरियाणा के गांवों की अब जल प्रबंधन में अहम भूमिका होगी। प्रदेश में ग्रामीण जल प्रबंधन को विकेंद्रीकृत और सामुदायिक भागीदारी आधारित मॉडल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से एक खास पहल की गई है। ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) नीति-2026 के तहत गांव अपने जलापूर्ति तंत्र के संचालन, रखरखाव और दीर्घकालिक स्थायित्व में अधिक जिम्मेदारी निभा सकेंगे।आज यहां एक समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्र में सुरक्षित, सतत, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित पेयजल सेवाओं को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हर जिले में मॉडल गांव विकसित किए जाएं।मुख्य सचिव ने कहा कि सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए केवल आधारभूत ढांचा तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव के लिए मजबूत व्यवस्था भी आवश्यक है। इसके लिए निरंतर निगरानी, मजबूत संस्थागत सहयोग और समुदाय की सक्रिय भागीदारी जरूरी है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सके।जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के आयुक्त एवं सचिव श्री जे. गणेशन ने बताया कि ग्राम जल एवं सीवरेज समितियों को नीति के तहत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। ये समितियां जलापूर्ति की योजना तैयार करने से लेकर निगरानी, आधारभूत ढांचे के प्रबंधन, शिकायत निवारण, बिलिंग, उपभोक्ता शुल्क संग्रहण और रिकॉर्ड के रखरखाव का कार्य भी करेंगी।
ये समितियां मरम्मत कार्यों और रखरखाव गतिविधियों की निगरानी के साथ-साथ विभाग की तकनीकी टीमों के साथ समन्वय भी स्थापित करेंगी।मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि जिला स्तर पर नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सभी उपायुक्त जिला जल एवं सीवरेज मिशन की बैठकें नियमित रूप से करें, ताकि ग्राम पंचायतों, ग्राम जल एवं सीवरेज समितियों और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित हो सके।नीति की एक विशेषता नीति-निर्धाण प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देना भी है।
अधिकारियों ने बताया कि ग्राम जल एवं सीवरेज समितियों में महिलाओं की कम से कम 50 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की गई है। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को पानी के बिलों के वितरण, उपभोक्ता शुल्क संग्रहण, जल गुणवत्ता परीक्षण और शिकायत निवारण जैसी गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है। इससे न केवल सेवा वितरण मजबूत होगा बल्कि ग्रामीण महिलाओं मिलेंगे अतिरिक्त रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने जल प्रबंधन प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए तकनीक आधारित पहलों की भी समीक्षा की। नागरिकों को भारत बिल पे और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे जल शुल्क का भुगतान अधिक सरल और त्वरित हो सकेगा।इसके अलावा, ऑनलाइन पोर्टल और सेवा ऐप्स के माध्यम से एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली भी विकसित की गई है, ताकि नागरिकों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा सके। टोल-फ्री नंबर 1800-180-5678 के माध्यम से केंद्रीकृत शिकायत निवारण व्यवस्था भी स्थापित की गई है। शिकायतों के समाधान में स्वयं सहायता समूहों, ग्राम जल एवं सीवरेज समितियों तथा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की भूमिका सुनिश्चित की गई है।
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इसके अलावा, विभाग को सेवा का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित समय-सीमा में नागरिकों की शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करने के लिए अधिकृत किया गया है।बैठक में ग्रामीण जलापूर्ति प्रणाली के संचालन और रखखाव के उद्देश्य से नीति के तहत विकसित वित्तीय सहायता एवं प्रोत्साहन ढांचे की भी समीक्षा की गई। इसके अंतर्गत ग्राम पंचायतों को मरम्मत एवं रखरखाव कार्यों के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी, जबकि उपभोक्ता शुल्क संग्रहण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन व्यवस्था भी लागू की गई है। अधिकारियों ने बताया कि गांव स्तर पर संचालन एवं रखरखाव गतिविधियों के लिए संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु एक व्यवस्थित फंड फ्लो मैकेनिज्म विकसित किया गया है।अधिकारियों ने बताया कि संचालन एवं रखरखाव नीति-2026 से ग्रामीण पेयजल ढांचे की कार्यक्षमता, पारदर्शिता और दीर्घकालिक स्थायित्व में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है। साथ ही, इससे स्थानीय समुदायों में स्वामित्व की भावना भी मजबूत होगी।बैठक में विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री विजयेंद्र कुमार, विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक श्री अनीश यादव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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