Haryana News: हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने आज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य में बाढ़ नियंत्रण कार्यों की प्रगति तथा वर्तमान बाढ़ स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक की। इस दौरान प्रदेश के सभी मंडलों में चल रहे बाढ़ नियंत्रण कार्यों, जल निकासी व्यवस्था, संवेदनशील क्षेत्रों की तैयारियों तथा विभागीय कार्यों की प्रगति का विस्तार से आकलन किया गया।मंत्री ने अधिकारियों को दिए कि मानसून के मद्देनज़र बाढ़ नियंत्रण से जुड़े सभी कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जाएं, ताकि प्रदेश के किसी भी क्षेत्र में जन-धन की हानि की स्थिति उत्पन्न न हो।बैठक के दौरान अधिकारियों ने मंत्री को अवगत कराया कि प्रदेश में बाढ़ नियंत्रण से संबंधित 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। शेष लगभग 18 प्रतिशत कार्य तेजी से प्रगति पर हैं, जिन्हें 31 जुलाई, 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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वहीं करीब 2 प्रतिशत कार्य पुनः निविदा (री-टेंडरिंग) एवं खरीद प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी कारणों के चलते अतिरिक्त समय ले सकते हैं।इस पर सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी ने विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष सभी कार्यों को 25 जुलाई, 2026 तक पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान बाढ़ नियंत्रण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी अधिकारी की लापरवाही अथवा कार्यों में अनावश्यक देरी सामने आती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।मंत्री ने निर्देश दिए कि जिन एजेंसियों ने निर्धारित समय सीमा के बावजूद कार्यों में देरी की है अथवा अब तक कार्य प्रारंभ नहीं किया है, उनके विरुद्ध भी नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि जनता की सुरक्षा से जुड़े कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई या उदासीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए।
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बैठक में अंबाला एवं हिसार मंडलों की स्थिति पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। मंत्री श्रुति चौधरी ने दोनों मंडलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पूरी सतर्कता बरतें तथा संवेदनशील स्थानों पर निरंतर निगरानी बनाए रखें। उन्होंने कहा कि जल निकासी व्यवस्था, तटबंधों, पंपिंग स्टेशनों तथा अन्य बाढ़ सुरक्षा व्यवस्थाओं को पूरी तरह क्रियाशील रखा जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई की जा सके।मंत्री ने निर्देश दिए कि जिन क्षेत्रों को बाढ़ संभावित (फ्लड एरिया) के रूप में चिन्हित किया गया है, वहां कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की छुट्टियां उनकी पूर्व अनुमति के बिना स्वीकृत न की जाएं। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान सभी अधिकारी एवं कर्मचारी पूरी सतर्कता के साथ अपने-अपने मुख्यालयों पर उपलब्ध रहें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रभाव से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।
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