जल संरक्षण का संदेश देती पुस्तक ‘एक बूँद सौ सवाल’ का हुआ विमोचन

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👉सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने किया विमोचन
Haryana News: हरियाणा निवास चंडीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने आज बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रसिद्ध लेखिका डा. शमीम शर्मा और उनकी पुत्रवधू डा. सरिता शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से लिखित पुस्तक ‘एक बूँद सौ सवाल’ का विमोचन किया और दोनों लेखिकाओं को इस अनुपम कृति के लिए बधाई दी।डॉ. अग्रवाल ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इसमें पानी के सभी आयामों ऐतिहासिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और पर्यावरण को बेहद सरल और सुंदर शैली में पिरोया गया है। यह पुस्तक हर आयु वर्ग के लिए अत्यंत पठनीय और उपयोगी है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने हाल ही में उद्योग विभाग की बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य में किसी भी नए इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट या पार्क की मंजूरी से पहले जल की उपलब्धता और उसकी व्यावहारिकता का आकलन अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, औद्योगिक इकाइयों के लिए जल का संरक्षण जरूरी है, ताकि भूमिगत जल दोहन को रोका जा सके।उन्होंने कहा कि हरियाणा एक अर्ध-शुष्क प्रदेश है, जहां जल का हमेशा से सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व रहा है। हमारी पुरानी परंपराओं (जैसे कुआँ-पूजन) और स्वच्छता के नियमों को धर्म से इसलिए जोड़ा गया था ताकि लोग पानी को प्रदूषित न करें और जलजनित बीमारियों से सुरक्षित रहें।

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डॉ. अग्रवाल ने कहा कि आज युवाओं की भाषा में एक शून्यता आ गई है। अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व का बोध होना बेहद ज़रूरी है। हिंदी देश को जोड़ने वाली प्रमुख भाषा है और इसे सहेजने के लिए ‘एक बूँद सौ सवाल’ जैसी सरल, गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक पुस्तकों का अधिक से अधिक सृजन होना चाहिए।इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दैनिक ट्रिब्यून के संपादक श्री नरेश कौशल ने कहा कि साहित्य अभिव्यक्ति नहीं, सामाजिक परिवर्तन का साधन है। कहानी, कविता, व्यंग्य, आत्मकथा, स्त्री विमर्श और हरियाणवी हास्य साहित्य हर विधा में डा. शमीम ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनकी लेखनी ने नारी अस्मिता, कन्या भ्रूण हत्या, सामाजिक विसंगतियों, ग्रामीण जीवन, पारिवारिक संबंधों और मानवीय मूल्यों को अत्यंत सहज किन्तु प्रभावशाली स्वर प्रदान किया है। हरियाणवी भाषा को साहित्यिक गरिमा प्रदान करने में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस कार्यक्रम में उर्दू प्रकोष्ठ हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के निदेशक ने बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत की और दोनों लेखिकाओं को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने जल जैसे समसामायिक विषय पर पुस्तक लेखन का कार्य किया है, जो कि सराहनीय है। हम सभी को जल बचाने पर विशेष ध्यान देना होगा। इस मौके पर पुस्तक की लेखिका डा. शमीम शर्मा ने कहा कि पुस्तक में जल संरक्षण से जुड़े 49 अध्याय हैं। जल बचाना आज की जरूरत है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुस्तक की रचना की गई है।

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