टोक्यो विश्वविद्यालय में गूंजा गीता का सार्वभौमिक संदेश

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👉अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव-2026 के अंतर्गत आयोजित हुआ ऐतिहासिक ‘अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार’
👉अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का वीडियो संदेश भी सुनाया गया
Haryana News:विश्व की प्राचीनतम ज्ञान परंपराओं और आधुनिक वैश्विक चिंतन का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव (IGM) 2026 के अंतर्गत विश्वप्रसिद्ध टोक्यो विश्वविद्यालय में ‘अंतरराष्ट्रीय गीता सेमिनार’ का भव्य आयोजन किया गया। आधुनिक युग में वैश्विक शांति, मानसिक संतुलन और मानवीय मूल्यों की स्थापना में श्रीमद्भगवद्गीता की भूमिका पर केंद्रित इस सेमिनार ने भारत और जापान के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक तथा शैक्षणिक संबंधों को नई दिशा प्रदान की।
वैश्विक ज्ञान और अकादमिक अनुसंधान के शीर्ष केंद्र टोक्यो विश्वविद्यालय में आयोजित इस ऐतिहासिक सेमिनार में भारत और जापान के प्रतिष्ठित दार्शनिकों, राजनायिकों, उद्योगपतियों, विद्वानों और विद्यार्थियों ने सहभागिता कर गीता के सार्वभौमिक संदेश पर गंभीर विमर्श किया।परम पूज्य गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने अपने दिव्य उद्बोधन में कहा कि गीता किसी एक देश, संप्रदाय अथवा धर्मग्रंथ की सीमाओं में बंधी नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय के तनाव, अस्थिरता और वैश्विक संघर्षों के बीच गीता का निष्काम कर्मयोग तथा मानसिक संतुलन का सिद्धांत विश्व को शांति और समरसता की दिशा प्रदान कर सकता है।स्वामी गुरु शरणानंद जी महाराज ने भी गीता के आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता केवल दर्शन नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।कार्यक्रम के दौरान हरियाणा के माननीय मुख्यमंत्री का विशेष वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने कुरुक्षेत्र की पावन धरा से निकले गीता संदेश के वैश्विक प्रसार की सराहना करते हुए भारत और जापान के सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने अपने उद्बोधन में श्रीमद्भगवद्गीता की कालजयी एवं सार्वभौमिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता ऐसा दिव्य ज्ञानग्रंथ है, जो समय, संस्कृति, भाषा और धर्म की सीमाओं से परे समस्त मानवता को मार्गदर्शन प्रदान करता है।

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उन्होंने कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन, कर्तव्य, आत्मानुशासन और वैश्विक कल्याण का शाश्वत संदेश है।उन्होंने वर्ष 2016 से प्रारंभ हुई अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की वैश्विक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि तत्कालीन हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल के दूरदर्शी नेतृत्व में आरंभ हुआ यह अभियान आज विश्व के अनेक देशों तक पहुँच चुका है और शांति, सद्भाव तथा मानवीय मूल्यों के वैश्विक आंदोलन के रूप में स्थापित हो रहा है।डॉ. अग्रवाल ने भारत और जापान के बीच विद्यमान गहरे सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, सजगता, सम्मान और आध्यात्मिक चेतना जैसे साझा मूल्य विद्यमान हैं। उन्होंने भारत और जापान के सुदृढ़ आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग का भी उल्लेख किया और कहा कि यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक आदान-प्रदान को भी सशक्त बना रही है।उन्होंने कहा कि भगवद्गीता संपूर्ण मानवता के लिए एक मार्गदर्शक ग्रंथ है तथा यह भारत और जापान के बीच गहन बौद्धिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सहयोग का एक सशक्त सेतु बन सकती है। उनके अनुसार, गीता का संदेश आज के वैश्विक समाज को शांति, समरसता और मानवीय मूल्यों की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।भारत के दूतावास के प्रतिनिधियों तथा जापान में भारत के पूर्व राजदूत सतोशी सुजुकी ने भारत-जापान के प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों के इस नए अध्याय की सराहना की। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव की वैश्विक अवधारणा, उसके प्रशासनिक दृष्टिकोण तथा सांस्कृतिक उद्देश्यों को विस्तार से प्रस्तुत किया।सेमिनार को टोक्यो विश्वविद्यालय में आयोजित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रोफेसर कातो सान के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया। महाभारत के जापानी अनुवाद कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले प्रोफेसर कावामुरा तथा गीता के गहन अध्ययन एवं जापानी अनुवाद के लिए समर्पित प्रोफेसर सातो सान ने अपने शोध अनुभव साझा किए और गीता के वैश्विक महत्व पर प्रकाश डाला।

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भारत में मारुति सुजुकी के संचालन से जुड़े वरिष्ठ उद्योगपति कोइची सुजुकी की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन के सामाजिक एवं आर्थिक महत्व को भी नई ऊंचाई प्रदान की।सेमिनार की सबसे प्रेरणादायक विशेषता टोक्यो विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। बड़ी संख्या में उपस्थित छात्रों ने गीता के संदेशों के प्रति गहरी रुचि दिखाई और विद्वानों से संवाद स्थापित किया।कार्यक्रम का शुभारंभ जापानी संस्कृति के प्रतीक पारंपरिक ताइको ड्रमर्स की ऊर्जावान प्रस्तुति से हुआ, जिसने उपस्थित अतिथियों का भव्य स्वागत किया। भारत और जापान की सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर समागम पूरे आयोजन में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।महाभारत और गीता पर उत्कृष्ट शोध एवं अनुवाद कार्य करने वाले जापानी विद्वानों को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। शॉल, स्मृति चिह्न एवं सम्मान पत्र प्रदान कर उन्हें अलंकृत किया गया। इस अवसर पर सुजुकी सान तथा गांधी और गीता पर वृत्तचित्र निर्माण करने वाली युकारी सान को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया।कार्यक्रम के दौरान टोक्यो विश्वविद्यालय में स्थापना हेतु स्वामी ज्ञानानंद महाराज, स्वामी गुरुशरणानंद महाराज, डॉ अमित अग्रवाल और उपेन्द्र सिंघल द्वारा प्रोफेसर ताका हीरो काटो को गीता भेंट की गई।कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव श्री उपेंद्र सिंघल ने बताया कि एक ऐतिहासिक पहल के रूप में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा पहली बार अष्टाध्यायी गीता का जापानी भाषा में अनुवाद प्रकाशित कर सेमिनार के दौरान विद्वानों एवं अतिथियों को भेंट किया गया। यह प्रयास भारत और जापान के सांस्कृतिक संवाद को नई दिशा देने वाला माना गया।कार्यक्रम स्थल पर कुरुक्षेत्र, गीता के संदेशों तथा भारत-जापान की सांस्कृतिक समानताओं को प्रदर्शित करती एक विशाल प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। प्रदर्शनी का अवलोकन करने वाले जापानी विद्यार्थियों को विशेष स्मृति उपहार प्रदान किए गए।भारत और जापान की कलात्मक परंपराओं के समन्वय से तैयार किए गए विशेष ‘फ्यूजन सांस्कृतिक कार्यक्रमों’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता को सजीव रूप से प्रस्तुत किया।महोत्सव के डिजिटल अभियान के अंतर्गत जापान में 14 दिवसीय ऑनलाइन गीता क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

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इस प्रतियोगिता को सोशल मीडिया पर व्यापक लोकप्रियता प्राप्त हुई, जिसमें जापान, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और भारत सहित अनेक देशों के हजारों प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सेमिनार के दौरान विजेताओं को मंच पर सम्मानित एवं पुरस्कृत किया गया।उन्होंने विशेष रूप से श्री अजय नरूला, श्री रोहन अग्रवाल, हिन्दू स्वयंसेवक संघ, जियो गीता, गीता परिवार, इस्कॉन तथा अन्य सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों का दिन-रात किए गए अथक सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।इस संपूर्ण आयोजन के सफल संचालन में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड एवं गीता जयंती मेला प्राधिकरण के वरिष्ठ सदस्यों श्री विजय नरूला, श्री अलकेश मौदगिल, श्री अशोक रोशा, श्री गुरनाम सैनी, डॉ. ऋषिपाल मथाना तथा डॉ. एम.के. मौदगिल की सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही।टोक्यो विश्वविद्यालय में आयोजित यह ऐतिहासिक सेमिनार केवल एक अकादमिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह भारत और जापान के मध्य आध्यात्मिक संवाद, सांस्कृतिक सहयोग और वैश्विक शांति के साझा संकल्प का एक सशक्त प्रतीक बनकर उभरा। गीता का संदेश अब कुरुक्षेत्र की सीमाओं से आगे बढ़कर विश्व मानवता के लिए शांति, समरसता और कर्तव्यबोध का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी श्री तुषार सैनी, पुंडरी के विधायक श्री सतपाल जांबा, पूर्व कुलपति डॉ. मार्कण्डेय, मेयर श्रीमती रेणु बाला गुप्ता तथा श्री श्यामलाल बंसल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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