Sunday, April 19, 2026
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विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में रोड़े अटकाने का काम किया:मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

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👉कहा ,कांग्रेस ने महिला आरक्षण के नाम पर केवल दिखावा किया
👉रोहतक में प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम ने कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों को बताया महिलाओं की विरोधी
Haryana News:हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हाल ही में संसद में विपक्ष ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” बिल को पास नहीं होने दिया और ऐसा करके सभी विपक्षी पार्टियों ने महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में रोड़े अटकाने का काम किया है। अभी तक कांग्रेस ने महिलाओं को आरक्षण दिलाने के नाम पर केवल दिखावा किया है।मुख्यमंत्री रविवार को रोहतक में प्रेस कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पश्चिम दिल्ली से सांसद कमलजीत सहरावत , भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री मोहन लाल कौशिक समेत अन्य गणमान्य नेता उपस्थित थे।श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि गत 16 व 17 अप्रैल को देश की सर्वोच्च पंचायत में विपक्ष ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” बिल का विरोध करके हमारी बहन-बेटियों के हक पर डाका डाला है। लोकतंत्र के मंदिर, संसद में जो कुछ भी हुआ, वह न केवल अलोकतांत्रिक था, बल्कि हमारे देश की आधी आबादी के भविष्य पर एक बड़ा प्रहार था। इस प्रकरण ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टी.एम. सी. और डी.एम.के. जैसे विपक्षी दलों का असली चेहरा देश के सामने उजागर कर दिया है।उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब बात महिलाओं को अधिकार देने की आती है, तो उनका असली चरित्र महिला-विरोधी और सत्ता का लोभी हो जाता है। यह महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन विपक्ष ने इस अवसर को भी अपनी संकीर्ण राजनीति की भेंट चढ़ा दिया।मुख्यमंत्री ने कहा कि गत 16 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन क्रांतिकारी विधेयक पेश किए थे। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक । इन विधेयकों को लाने के पीछे केंद्र सरकार का संकल्प बहुत स्पष्ट था। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के अनुसार, महिला आरक्षण 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होना था।

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केन्द्र सरकार जानती थी कि यदि हम जनगणना और लंबी परिसीमन प्रक्रिया का इंतजार करते, तो हमारी बहनों को 2029 के आम चुनाव में भी 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाता। इसीलिए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह साहसिक निर्णय लिया कि इस आरक्षण को जनगणना की शर्त से अलग किया जाए, ताकि वर्ष 2029 के आम चुनावों में ही हमारी महिला शक्ति संसद में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा सके।उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि महिलाओं की भागीदारी कोई दया नहीं, उनका अधिकार है। लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में रोड़े अटकाने का काम किया है। यह देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात था।श्री नायब सिंह सैनी ने सवाल किया कि आखिर विपक्ष महिलाओं के आरक्षण से इतना डर क्यों रहा है? उत्तर स्पष्ट है कि ये दल जानते हैं कि जिस दिन देश की महिलाओं को उनका पूरा राजनीतिक अधिकार मिल गया, उसी दिन इनकी परिवारवाद की राजनीति खत्म हो जाएगी। महिलाओं के सशक्तिकरण से सबसे बड़ा खतरा उन दलों को है, जिन्होंने दशकों तक महिलाओं को केवल वोट बैंक समझा, लेकिन नेतृत्व का अधिकार नहीं दिया।उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने वर्षों तक महिला आरक्षण के नाम पर केवल दिखावा किया। समितियां बनाई, बहाने बनाए, लेकिन कभी महिलाओं को उनका अधिकार नहीं दिया। दूसरी ओर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम लाकर महिलाओं को सम्मान दिया। लेकिन जब उसे लागू करने की घड़ी आई, तब विपक्ष का असली महिला विरोधी चेहरा सामने आ गया।उन्होंने कहा कि विपक्ष ने परिसीमन के नाम पर झूठ और भ्रम फैलाया, कहा गया कि इससे कुछ राज्यों को नुकसान होगा। लेकिन गृह मंत्री श्री अमित शाह ने संसद में तथ्यों के साथ स्पष्ट कर दिया कि किसी भी राज्य का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। सीटों में समान वृद्धि होगी, सभी राज्यों का संतुलन बना रहेगा। फिर भी विपक्षी नेता लगातार झूठ बोलते रहे, क्योंकि उनका उद्देश्य महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि स्वार्थ की राजनीति करना है।मुख्यमंत्री ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 1971 में जब हमारी आबादी 54 करोड़ थी, तब लोकसभा की सीटें 550 तय की गई थीं।

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आज हम 140 करोड़ हैं। इसलिए, यह आवश्यक है कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाए ताकि हर नागरिक का सही प्रतिनिधित्व हो सके। इसको लेकर विपक्ष ने एक और झूठ फैलाया कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान होगा।उन्होंने स्पष्ट करते हुए बताया कि केंद्र सरकार का मॉडल सभी राज्यों में समान रूप से 50 प्रतिशत सीटों की वृद्धि का था। उदाहरण के तौर पर, दक्षिण भारतीय राज्यों की वर्तमान हिस्सेदारी 23.76 प्रतिशत है, जो इस नए मॉडल में बढ़कर 23. 87 प्रतिशत हो जाती। तमिलनाडु की सीटें 39 से बढ़कर 59 और कर्नाटक की 28 से बढ़कर 42 होने वाली थीं। यानी किसी भी राज्य का हक छीनने का नहीं, बल्कि सबका हक बढ़ाने का यह प्रस्ताव था।लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टी.एम.सी. और डी.एम.के. ने इन विधेयकों का विरोध करके यह सिद्ध कर दिया है कि वे केवल महिलाओं के कल्याण का ढोंग करते हैं। समाजवादी पार्टी ने धर्म आधारित आरक्षण की असंवैधानिक मांग उठाकर केवल मामले को भटकाने का काम किया है, जबकि हमारा संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। विपक्ष जानता है कि अगर बहस असली मुद्दे पर हुई, तो देश की महिलाएं पूछेंगी कि इतने वर्षों तक उन्हें अधिकार क्यों नहीं दिया गया, इसलिए मुद्दे भटकाए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोगली नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेसी नेता जो शाहबानो मामले में महिलाओं के खिलाफ खड़े थे और जिन्होंने दशकों तक महिला आरक्षण को तकनीकी बहानों और फाइलों में दबाकर रखा, वे आज भी वही साजिश दोहरा रहे हैं।उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब भारत आजाद हुआ, उसी समय कई अन्य देश भी आजाद हुए थे। लेकिन कुछ देश विकसित बन चुके हैं, और भारत को उस मुकाम तक पहुंचने में दशकों लग गए। इस देरी का कारण क्या था? मैं स्पष्ट कहना चाहता हूं कि वह था कांग्रेस की नकारात्मक और विकास-विरोधी राजनीति। इनकी राजनीति का मूलमंत्र रहा है- ‘अटकाओ, लटकाओ व भटकाओ ।” शुरू से ही इन्होंने हर उस निर्णय का विरोध किया, जो देश को आगे ले जाने वाला था।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि जब महिलाओं के सम्मान के लिए तीन तलाक कानून लाया गया, जब धारा 370 को हटाकर देश को एकीकृत किया गया, जब समान नागरिक संहिता पर चर्चा हुई, जब ‘वन नेशन, वन इलेक्शन की बात आई,जब मतदाता सूची को शुद्ध करने की बात हुई, जब केन्द्रीय वक्फ कौंसिल में सुधार की चर्चा हुई, जब नागरिकता संशोधन अधिनियम लाया गया, हर बार, हर मोर्चे पर, इन्होंने सिर्फ विरोध ही किया।उन्होंने विपक्ष को सचेत करते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों पर राजनीति करने वालों को देश की महिलाएं कभी माफ नहीं करेंगी। आज गांव की महिलाएं पंचायत चला रही हैं। शहरों की महिलाएं उद्योग चला रही हैं, देश की महिलाएं हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं, तो फिर संसद में उनकी भागीदारी से विपक्ष क्यों डर रहा है? सच्चाई यह है कि विपक्ष को डर है कि महिलाओं के सशक्त होने से झूठ पर टिकी उनकी राजनीति की जमीन खिसक जाएगी। विपक्ष ने केवल एक विधेयक को नहीं गिराया है, बल्कि करोड़ों माताओं और बेटियों के सपनों को कुचलने का प्रयास किया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने नारी शक्ति वंदन बिल को रोककर लोकतंत्र की मर्यादा को तार-तार किया है। संसद में विपक्ष का व्यवहार लोकतंत्र के मंदिर में नारी शक्ति का चीरहरण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के राजनीतिक अधिकारों को छीनने की कोशिश करना, आधुनिक राजनीति का चीरहरण है। विपक्ष के पास न नीति है, न नीयत। उनके पास सिर्फ नारी शक्ति के प्रति नफरत है।उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने वाली विपक्षी पार्टियों को चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में देश की महिलाएं अपने वोट की ताकत से महिला – विरोधी मानसिकता रखने वाले दलों को करारा जवाब देंगी।

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मीडिया के सवालों के दिए जवाब
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया गया था, लेकिन इसे तत्काल लागू न करने के पीछे संवैधानिक प्रक्रियाएं जुड़ी हुई थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पहले से निर्धारित थी, जिसे ध्यान में रखते हुए ही अधिनियम को लागू करने की रूपरेखा बनाई गई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1976 में ही यह तय कर दिया गया था कि अगला परिसीमन 2026 में होगा, इसलिए इस अधिनियम को उसी प्रक्रिया से जोड़ा गया।मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने दोहराया कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने मंडियों में फसल उठान को लेकर कहा कि सरकार द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं और किसी प्रकार की समस्या नहीं है। उन्होंने बताया कि फसल आगमन का समय अब सीमित हो गया है, जिससे दबाव बढ़ता है, लेकिन सरकार पूरी तत्परता से कार्य कर रही है और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।इस अवसर पर लोकसभा सांसद श्रीमती कमलजीत सहरावत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को और प्रभावी बनाने हेतु 16 अप्रैल, 2026 को संसद में तीन महत्वपूर्ण विधेयक प्रस्तुत किए गए।]

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उन्होंने कहा कि सितंबर, 2023 में लोकसभा और राज्यसभा द्वारा पारित इस ऐतिहासिक अधिनियम के माध्यम से लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में पुनः सरकार बनने के पश्चात विपक्ष द्वारा की गई जातिगत जनगणना की मांग को स्वीकार करते हुए सरकार ने जनगणना प्रक्रिया में जाति आधारित आंकड़ों को शामिल करने का निर्णय लिया। देश की जनसंख्या को देखते हुए इस प्रक्रिया में समय ज्यादा लगने की संभावना है, जिससे 2029 के आम चुनावों में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिलने में विलंब हो सकता था। इसी परिप्रेक्ष्य में सरकार ने निम्नलिखित तीन संशोधित विधेयक संसद में प्रस्तुत किए। इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम को परिसीमन प्रक्रिया से अलग कर, यह सुनिश्चित करना है कि वर्ष 2029 के आम चुनावों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सके। उन्होंने विपक्षी पार्टियों को महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की जनता सब देख रही है इनको भविष्य में इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।

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