संवाद जनहित में और सार्थक विषयों पर हो-मनोहर लाल

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Haryana News: केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी मामलों के मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि संवाद में तथ्य और सच्चाई होनी चाहिए। सस्ती लोकप्रियता के लिए झूठे नारों के सहारे सुर्खियों में बने रहना उचित नहीं। संवाद जनहित में होना चाहिए।केंद्रीय मंत्री रविवार को करनाल स्मार्ट सिटी की 23. 67 करोड़ की चार परियोजनाओं के उदघाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्मार्ट सिटी के इन प्रोजेक्ट्स से लोगों को फायदा होगा। चार-पांच प्रोजेक्ट अभी और बचे हैं जिनमें से एक बड़ा एलिवेटेड ब्रिज का है। उस पर काम जारी है। जल्दी ही इसे पूरा कराया जाएगा।कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा युवाओं से संवाद की कवायद जारी रखने संबंधी एक सवाल पर केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि संवाद करना बुरी बात नहीं है, सबको करना चाहिए। संवाद के बिना राजनीतिक पार्टी के लोग अपनी भूमिका पूरी नहीं कर पाएंगे। लेकिन संवाद में तथ्य और सच्चाई होनी चाहिए। झूठे स्लोगन और सस्ती लोकप्रियता के लिए सुर्खियों में बने रहना न समाज हित में है और न राजनीति के लिए अच्छा है।

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ऐसे नेताओं की कथनी और करनी में अंतर के कारण कुछ विषयों पर तो समाज में भी विरोधाभास देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि संवाद सार्थक विषयों पर होना चाहिए। ऐसे विषय जो युवाओं अथवा जनहित में हों। केवल भडक़ाने का काम उचित नहीं। खासकर एस्टैब्लिशमेंट के विरुद्ध भडक़ाने का जो सिलसिला उन्होंने शुरू किया है, यह कतई उचित नहीं है, निंदनीय है। प्रधानमंत्री द्वारा भारतीयों को एक बताने संबंधी प्रश्र पर केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि बिल्कुल सही है, हम सब एक हैं। प्रधानमंत्री ने कहा है कि वसुधैव कुटुंबकम। पूरा विश्व एक परिवार है। उस नाते से ही सभी को आपस में सद्व्यवहार करना चाहिए। प्रधानमंत्री तीन बड़े देशों की यात्रा के दौरान दुनिया को अच्छा संदेश दे रहे हैं। वे ऐसा संदेश पहले भी देते रहे हैं और आगे भी देते रहेंगे।एक अन्य प्रश्न पर कहा कि सफाई कर्मचारियों ने उनके सम्मुख अपनी मांग रखी है जिसे वे सरकार तक पहुंचाएंगे। सरकार इस मामले में उचित निर्णय लेगी।

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चीनी की बढ़ी कीमतों संबंधी सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मार्केट में कभी रेट कम होते हैं, कभी ज्यादा। पहली बार रेट बढ़े हैं, ऐसा नहीं है। विपक्षी अपना समय भूल गए कि जब इन्हीं चीजों के ऊपर वे हिल जाते थे। प्याज और दालें किस सीमा तक जाती थीं, क्या चीनी उस समय महंगी नहीं हुई? अच्छी बात यह है कि सरकार ने चीनी महंगी होते ही तुरंत कदम उठाया। नतीजतन एक ही दिन में भाव 15 रुपये कम भी हुआ। मेघवाल शब्द को लेकर प्रदेश में उठे विवाद संबंधी प्रश्न पर उन्होंने कहा कि ऐसी मांग ऐच्छिक व वैकल्पिक होती हैं, किसी पर थोपी नहीं जा सकती हैं। अगर कोई एक वर्ग ऐसा है जो कहता है कि हां, हमको चमार की बजाय मेघवाल लिखवाना है, तो कोई आपत्ति थोड़ी कर सकता है। ऐसा भी विषय सरकार के विचाराधीन हो सकता है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि उस जाति के सभी को मेघवाल दर्ज ही कराना होगा, यह कहीं अनिवार्यता नहीं हो सकती।

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