👉चार नई श्रम संहिताएं श्रमिकों और उद्योगों के लिए ऐतिहासिक सुधार – विज
👉हरियाणा में 94 लाख से अधिक श्रमिक कार्यरत, नई श्रम संहिताओं के लागू होने की तैयारी तेज – विज
Haryana News: हरियाणा के श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया से आग्रह किया कि नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के तहत बनाए जाने वाले नियमों एवं विनियमों के ड्राफ्ट राज्यों के श्रम विभागों को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि पूरे देश में एकरूपता के साथ समान नियम लागू किए जा सकें। उन्होंने कहा कि यदि किसी राज्य को अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कुछ संशोधन करने की आवश्यकता हो, तो वह बाद में किए जा सकते हैं।
इस पर, केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने श्री विज के सुझाव की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 8 मई को ही संबंधित नियमों का प्रारूप तैयार कर लिया है और शीघ्र ही सभी राज्यों को ड्राफ्ट नियम भेज दिए जाएंगे।श्री विज आज चण्डीगढ़ में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में वर्चुअल माध्यम से दिल्ली से आयोजित बैठक में भाग ले रहे थे। इस बैठक में पूरे देशभर से राज्यों व यूटी प्रशासन के श्रम मंत्रियों सहित सचिवों ने भाग लिया।बैठक के दौरान श्री विज ने वेतन संहिता- 2019, औद्योगिक संबंध संहिता- 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता- 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल परिस्थितियां संहिता- 2020 को क्रियान्वित करने पर की जा रही राज्य की कार्यवाही की जानकारी भी सांझा की और बताया कि केंद्र सरकार द्वारा तैयार की गई चार नई श्रम संहिताओं को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए श्रमिकों, उद्योगों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक संवाद स्थापित किया जाएगा, ताकि उनके सुझावों को शामिल करते हुए किसी भी प्रकार की व्यावहारिक कठिनाई का समाधान किया जा सके।
उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने चारों श्रम संहिताओं के प्रारूप नियमों को सार्वजनिक परामर्श (पब्लिक डोमेन) के लिए जारी कर दिया है तथा हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार नई श्रम संहिताओं को लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ-साथ उद्योगों के लिए सरल एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्री विज ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चार नई श्रम संहिताओं का निर्माण श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी कदम है। उन्होंने कहा कि पूर्व में लागू अधिकांश श्रम कानून औपनिवेशिक काल की परिस्थितियों के अनुरूप बनाए गए थे, जिन्हें बदलते समय और आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित एवं अद्यतन करना अत्यंत आवश्यक था।
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