👉डीपीआर हरियाणा ने साहित्यकार डॉ. देशवाल की नई कृति का किया अनावरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में साहित्य की भूमिका को बताया अहम
Haryana News: सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग, हरियाणा के निदेशक डॉ. आदित्य दहिया ने शुक्रवार को अपने सिविल सचिवालय, चंडीगढ़ स्थित कार्यालय में पद्मश्री एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. संतराम देशवाल द्वारा लिखित पुस्तक ‘भारतीय संस्कृति की अवधारणा’ का विधिवत विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. देशवाल को नई साहित्यिक कृति के प्रकाशन पर बधाई देते हुए उनके दीर्घकालिक साहित्यिक व सांस्कृतिक योगदान की सराहना की।इस मौके पर डॉ. आदित्य दहिया ने कहा कि भारतीय संस्कृति केवल प्राचीन परंपराओं का परिचय मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन-मूल्यों, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय पहचान की सुदृढ़ आधारशिला है। साहित्य इन मूल्यों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित करने का सबसे सशक्त माध्यम है।
इसे भी पढ़ें भावांतर भरपाई योजना के साथ हरियाणा के किसानों को बाजरे का 2900 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिलेगा: मुख्यमंत्री
साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज की स्मृतियों, अनुभवों और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा विविधता में एकता, सह-अस्तित्व, मानवीय मूल्यों, लोकजीवन और सामाजिक समरसता की समृद्ध विरासत को समेटे हुए है। समकालीन दृष्टि से लिखी गई यह कृति पाठकों को अपनी जड़ों से जोड़ने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करेगी।पुस्तक में भारतीय संस्कृति के विविध आयामों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित 20 विचारोत्तेजक निबंध संकलित हैं। यह कृति बदलते समय में सांस्कृतिक प्रासंगिकता को रेखांकित करते हुए समृद्ध परंपरा और समकालीन चिंतन के बीच सार्थक संवाद स्थापित करती है। यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्य प्रेमियों और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।
इसे भी पढ़ें आमजन की सुविधा के लिए शहरी क्षेत्रों में 1646 वार्ड कमेटियां गठित की: मुख्यमंत्री
लेखक पद्मश्री डॉ. संतराम देशवाल ने अपनी लेखन यात्रा साझा करते हुए बताया कि साहित्य और संस्कृति के प्रति उनका जुड़ाव उन्हें निरंतर प्रेरित करता रहा है। उनकी अब तक करीब तीन दर्जन (36) पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें हरियाणवी साहित्य, लोक संस्कृति, भाषा, कविता, ग़ज़ल, यात्रा-वृत्तांत, जीवनी, अनुवाद और समीक्षा जैसे विविध विषय शामिल हैं।उल्लेखनीय है कि डॉ. देशवाल की दो पुस्तकों को ‘हरियाणा साहित्य अकादमी’ के श्रेष्ठ कृति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा, साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों में शामिल ‘महाकवि सूरदास आजीवन साहित्य साधना सम्मान’ तथा ‘जनकवि मेहर सिंह पुरस्कार’ से भी नवाजा गया है।इस अवसर पर सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के संयुक्त निदेशक (प्रशासन) श्री मानव मलिक तथा परियोजना निदेशक डॉ. पवन आर्य भी मौजूद रहे।
👉नवीनतम समाचार पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
Whatsapp Channel 👉 🛑https://whatsapp.com/channel/0029VbBYZTe89inflPnxMQ0A
Whatsapp Group👉 🛑https://chat.whatsapp.com/EK1btmLAghfLjBaUyZMcLK
Telegram Channel👉 🛑https://t.me/punjabikhabarsaarwebsite
☎समाचार और विज्ञापनों के लिए, हमारे व्हाट्सएप नंबर +91 98786-15057 पर संपर्क करें




